Latest Update:- शिक्षकों के समायोजन पर उठे गंभीर सवाल, आपत्तियों के बाद मचा हड़कंप

Latest Update:- शिक्षकों के समायोजन पर उठे गंभीर सवाल, आपत्तियों के बाद मचा हड़कंप
 

जिले में शिक्षकों के समायोजन को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं। एकल और शिक्षक-विहीन स्कूलों को खोलने के उद्देश्य से किया गया समायोजन अब विवादों में घिरता नजर आ रहा है। कई मामलों में नियमों की अनदेखी सामने आई है, जिससे शिक्षक वर्ग में नाराजगी बढ़ गई है।

12 साल से प्रधानाध्यापक रहे शिक्षक को सहायक दिखाया गया

सबसे चौंकाने वाला मामला कायमगंज क्षेत्र का है। यहां वर्ष 2013 से प्रधानाध्यापक पद पर कार्यरत शिक्षक को कागजों में सहायक अध्यापक दिखाकर दूसरे विद्यालय में समायोजित कर दिया गया।
जानकारी के मुताबिक, उच्च प्राथमिक विद्यालय नीबलपुर, कायमगंज में तैनात सैय्यद आरिफ जमाल को 12 वर्ष बाद अचानक सहायक दर्शाते हुए उच्च प्राथमिक विद्यालय जिनौल भेज दिया गया। यह कार्रवाई नियमों के विपरीत बताई जा रही है।
महिला शिक्षकों को दूरस्थ स्कूल आवंटित, बढ़ी मुश्किलें

समायोजन प्रक्रिया में महिला शिक्षकों के साथ भी लापरवाही के आरोप लगे हैं।

संविलियन विद्यालय बिराहिमपुर जागीर की सहायक अध्यापक डिंपी को लगभग 40 किलोमीटर दूर स्कूल आवंटित किया गया, जबकि प्राथमिक विद्यालय अलियापुर की सहायक अध्यापक मीता बघेल को 30 किलोमीटर दूर विद्यालय में भेजा गया।
इतनी लंबी दूरी तय करना महिला शिक्षकों के लिए रोज़ाना आसान नहीं है। यही वजह है कि इन निर्णयों पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

शिक्षकों ने दर्ज कराई आपत्ति, मांगी आधिकारिक जांच
गलत समायोजन से नाराज शिक्षकों ने बीएसए कार्यालय में लिखित आपत्ति दर्ज कराई है।
इसके साथ ही प्राथमिक शिक्षक संघ के जिला संयोजक अवनीश चौहान और सह संयोजक राजकिशोर शुक्ला ने भी पूरे मामले की शिकायत बीएसए से की है।

उनका कहना है कि समायोजन में official guidelines और eligibility नियमों की अनदेखी की गई है, जो स्वीकार्य नहीं है।
बीईओ की रिपोर्ट पर सवाल, जवाब तलब
मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए बीएसए विश्वनाथ वी. प्रताप सिंह ने स्पष्ट किया कि
कायमगंज के बीईओ द्वारा गलत रिपोर्ट भेजी गई है।
उन्होंने बताया कि संबंधित बीईओ से आधिकारिक जवाब तलब किया गया है और जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। यह पूरी प्रक्रिया official announcement के तहत की जा रही है।

निष्कर्ष
शिक्षकों का समायोजन एक संवेदनशील प्रक्रिया है, जिसका सीधा असर शिक्षा व्यवस्था और शिक्षकों के जीवन पर पड़ता है। यदि इसमें पारदर्शिता और नियमों का पालन नहीं हुआ, तो ऐसे विवाद लगातार सामने आते रहेंगे। अब देखना यह है कि जांच के बाद जिम्मेदार अधिकारियों पर क्या कार्रवाई होती है और शिक्षकों को न्याय कब तक मिलता है।

 

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