जनगणना टीमों को सोसाइटी में नहीं मिल रही एंट्री, प्रशासन सख्त, FIR तक की चेतावनी
देशभर में जनगणना का काम तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। इसी बीच हरियाणा के गुरुग्राम से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। कई जनगणना कर्मियों ने शिकायत की है कि कुछ गेटेड सोसाइटियों में उन्हें अंदर जाने से रोका जा रहा है। कहीं गार्ड ने एंट्री नहीं दी, तो कहीं RWA की अनुमति का हवाला देकर कर्मचारियों को बाहर ही रोक दिया गया।
अब इस मामले पर प्रशासन ने सख्त रुख अपना लिया है।
पहचान पत्र दिखाने पर देना होगा प्रवेश
गुरुग्राम नगर निगम के संयुक्त आयुक्त और जनगणना नोडल अधिकारी पुनीत कुमार ने साफ कहा है कि जनगणना एक महत्वपूर्ण सरकारी प्रक्रिया है। इसमें बाधा डालना गंभीर मामला माना जाएगा। उन्होंने सभी RWA और सोसाइटी प्रबंधन से अपील की है कि यदि कोई कर्मचारी अपना आधिकारिक पहचान पत्र और ड्यूटी लेटर दिखाता है, तो उसे तुरंत प्रवेश दिया जाए।
प्रशासन का कहना है कि सही और समय पर डेटा जुटाना बेहद जरूरी है। यही आंकड़े आगे चलकर सरकारी योजनाओं, शिक्षा, स्वास्थ्य और विकास कार्यों की नींव बनते हैं। ऐसे में छोटी सी लापरवाही भी बड़े असर डाल सकती है।
कई जगह कर्मचारियों के साथ हुआ खराब व्यवहार
सूत्रों के मुताबिक, कुछ जनगणना कर्मियों ने यह भी बताया कि उनसे सवाल-जवाब किए गए, देर तक गेट पर रोका गया और कई बार अपमानजनक व्यवहार भी झेलना पड़ा। खासकर बड़ी हाउसिंग सोसाइटियों में यह परेशानी ज्यादा देखने को मिल रही है।
प्रशासन ने साफ कर दिया है कि जनगणना कर्मचारियों के काम में रुकावट पैदा करना कानूनन गलत है और भविष्य में ऐसे मामलों पर सीधे कार्रवाई हो सकती है।
जनगणना ड्यूटी से इनकार पड़ा भारी
इसी बीच गुरुग्राम में दो कर्मचारियों पर FIR की सिफारिश ने मामला और गंभीर बना दिया है। जानकारी के अनुसार, गढ़ी हरसरू स्थित जीएमपीएस स्कूल और मानेसर सेक्टर-1 के ओमपी स्कूल से जुड़े कर्मचारियों को जनगणना में गणक की जिम्मेदारी दी गई थी।
लेकिन प्रशासन का आरोप है कि कई बार सूचना देने के बावजूद दोनों कर्मचारियों ने काम में लापरवाही दिखाई। इतना ही नहीं, उन्होंने जनगणना ड्यूटी करने से साफ इनकार भी कर दिया।
इसके बाद सुपरवाइजर की लिखित शिकायत पर संयुक्त आयुक्त पुनीत कुमार ने मानेसर और सेक्टर-10 थाना प्रभारियों को FIR दर्ज करने की सिफारिश भेज दी।
3 साल तक की सजा का प्रावधान
प्रशासन ने याद दिलाया है कि Census Act 1948 की धारा 11 के तहत जनगणना कार्य में बाधा डालना, ड्यूटी से इनकार करना या सरकारी कर्मचारी के काम में रुकावट पैदा करना दंडनीय अपराध है।
इस कानून के तहत दोषी पाए जाने पर आरोपी को तीन साल तक की जेल हो सकती है। प्रशासन ने कहा है कि जनगणना जैसे राष्ट्रीय महत्व के काम में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
क्यों जरूरी है जनगणना में सहयोग?
विशेषज्ञ मानते हैं कि जनगणना सिर्फ आंकड़ों का काम नहीं है। इससे यह तय होता है कि किस इलाके में कितने स्कूल चाहिए, अस्पतालों की जरूरत कितनी है और सरकारी योजनाओं का लाभ किन लोगों तक पहुंचना चाहिए।
ऐसे में अगर किसी क्षेत्र का डेटा अधूरा रह जाता है, तो भविष्य में वहां की सुविधाओं पर भी असर पड़ सकता है। यही वजह है कि प्रशासन लगातार लोगों से सहयोग की अपील कर रहा है।