PPF और सुकन्या योजना की जीत, नया टैक्स रिजीम भी नहीं रोक पाया निवेशकों को
नया टैक्स रिजीम भी नहीं डिगा सका लोगों का भरोसास्मॉ ल सेविंग्स में ₹2.17 लाख करोड़ की रिकॉर्ड एंट्री, सरकार को मिली बड़ी राहत जब सरकार ने नए टैक्स रिजीम को ज्यादा आकर्षक बनाने के लिए कई बड़े official announcements किए, तब माना जा रहा था कि पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF), सुकन्या समृद्धि योजना और दूसरी सरकारी स्मॉल सेविंग्स स्कीम्स का क्रेज कम हो जाएगा।
लेकिन ज़मीनी हकीकत कुछ और ही कहानी कहती है।
ताज़ा official details के मुताबिक, देश के निवेशकों का भरोसा आज भी इन योजनाओं पर कायम है। यही वजह है कि वित्त वर्ष 2025-26 में 10 जनवरी तक नेशनल स्मॉल सेविंग्स फंड (NSSF) में कुल जमा राशि ₹2.17 लाख करोड़ तक पहुंच चुकी है। यह आंकड़ा पूरे साल के बजट अनुमान का लगभग दो-तिहाई है, जो सरकार के लिए बड़ी राहत बनकर आया है।
निवेशकों का भरोसा क्यों बना हुआ है?
नया टैक्स रिजीम टैक्स छूट के मामले में भले ही सीमित हो, लेकिन स्मॉल सेविंग्स स्कीम्स को लोग सिर्फ टैक्स बचाने के लिए नहीं चुनते।
यह योजनाएं आज भी सुरक्षा, स्थिर रिटर्न और सरकारी गारंटी का भरोसा देती हैं।
हर साल की तरह इस बार भी उम्मीद है कि मार्च तिमाही में निवेश और तेज होगा। आमतौर पर इसी समय PPF, सुकन्या समृद्धि योजना और दूसरी स्कीम्स में सबसे ज्यादा पैसा आता है। अधिकारियों का मानना है कि इस रफ्तार के साथ NSSF का कुल कलेक्शन शुरुआती लक्ष्य से भी आगे निकल सकता है।
सरकार को कैसे मिल रहा है सीधा फायदा?
स्मॉल सेविंग्स में बढ़ती जमा का सबसे बड़ा फायदा केंद्र सरकार को हो रहा है।
ज्यादा पैसा आने का मतलब है—सरकार को बाजार से कम कर्ज लेना पड़ेगा।
इसी वजह से 2025-26 के लिए सरकार ने NSSF से ऑफटेक घटाकर ₹3.43 लाख करोड़ रखा है, जो पिछले वित्त वर्ष के संशोधित अनुमान ₹4.12 लाख करोड़ से कम है। सरकार का लक्ष्य अगले साल राजकोषीय घाटे को 4.4% तक सीमित रखना है, जो पहले 4.8% था।
नया टैक्स रिजीम फिर भी क्यों नहीं पड़ा भारी?
पिछले बजट में नए टैक्स रिजीम को ज्यादा सरल और आकर्षक बनाया गया था। इसके बाद करीब 75% करदाता इस सिस्टम में शिफ्ट भी हो चुके हैं।
हालांकि, इस व्यवस्था में स्मॉल सेविंग्स पर टैक्स छूट नहीं मिलती।
वहीं पुराने टैक्स सिस्टम में धारा 80C के तहत ₹1.5 लाख तक की निवेश राशि पर टैक्स छूट मिलती है। इसके बावजूद निवेश की रफ्तार थमी नहीं। यह साफ संकेत है कि लोग अब सिर्फ टैक्स नहीं, बल्कि लंबी अवधि की सुरक्षा और स्थिरता को ज्यादा अहमियत दे रहे हैं।
ऊंची ब्याज दरें बनी सबसे बड़ी वजह
एक और अहम कारण है—ब्याज दरों का अंतर।
बीते एक साल में RBI ने रेपो रेट में 125 बेसिस पॉइंट की कटौती की है, जिससे बैंक FD की ब्याज दरों पर दबाव आया है।
इसके उलट,
PPF पर 7.1%
सुकन्या समृद्धि योजना पर 8.2%
सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम, NSC और किसान विकास पत्र जैसी योजनाओं पर भी आकर्षक ब्याज
यही कारण है कि निवेशक अब भी इन government benefits वाली योजनाओं को प्राथमिकता दे रहे हैं।
निष्कर्ष
नया टैक्स रिजीम भले ही सिस्टम को सरल बनाता हो, लेकिन भरोसे और स्थिर रिटर्न के मामले में स्मॉल सेविंग्स स्कीम्स आज भी आगे हैं।
ताज़ा आंकड़े साफ दिखाते हैं कि निवेशकों का भरोसा अब भी सरकारी योजनाओं के साथ मजबूती से जुड़ा हुआ है—और यही सरकार के लिए सबसे बड़ी राहत है।