अब अंगूठा नहीं, QR कोड से मिलेगा मुफ्त राशन – सरकार का बड़ा डिजिटल अपडेट

अब अंगूठा नहीं, QR कोड से मिलेगा मुफ्त राशन – सरकार का बड़ा डिजिटल अपडेट

अब नहीं लगेगा अंगूठा, मोबाइल से मिलेगा मुफ्त राशन सरकार लाने जा रही है डिजिटल फूड कूपन सिस्टम सरकार मुफ्त राशन व्यवस्था को और आसान बनाने की तैयारी में है।

अब राशन लेने के लिए न तो लंबी लाइन लगेगी और न ही बार-बार अंगूठा लगाना पड़ेगा।

अगले महीने से डिजिटल फूड कूपन के जरिए मुफ्त अनाज देने का नया तरीका आजमाया जाएगा। यह एक पायलट प्रोजेक्ट होगा, जिसे सीमित इलाकों में शुरू किया जा रहा है।

कहां शुरू होगा यह नया सिस्टम सरकार की ऑफिशियल जानकारी के मुताबिक, यह योजना पहले चरण में

चंडीगढ़, पुडुचेरी और गुजरात के तीन जिलों में लागू की जाएगी।यहां चुने गए लाभार्थियों को हर महीने डिजिटल फूड कूपन दिए जाएंगे।

कैसे मिलेगा डिजिटल राशन?

इस नए सिस्टम में राशन कार्ड धारकों के मोबाइल फोन पर RBI-इनेबल्ड डिजिटल वॉलेट में कूपन भेजे जाएंगे।

राशन लेने के लिए सिर्फ दुकान पर जाकर

QR कोड स्कैन करना होगा। कोई बायोमेट्रिक, कोई फिंगरप्रिंट झंझट नहीं।

बस मोबाइल, और आपका हक का अनाज।क्यों लाई जा रही है डिजिटल फूड करेंसी

सरकार का मकसद साफ है।

मुफ्त राशन योजना में पारदर्शिता बढ़ाना फर्जीवाड़े और लीकेज को रोकना

लाभार्थियों को तकनीकी परेशानियों से राहत देनासरल शब्दों में कहें तो,जो अनाज आपके लिए है, वही आपको मिले बिनाअटकाव।

समय सीमा भी होगी तय

डिजिटल कूपन को जमा करके रखने की सुविधा नहीं होगी। सरकार इसके इस्तेमाल के लिए एक तय समय सीमा रखेगी, ताकि सिस्टम सही तरीके से काम करे।

यह पूरा प्रयोग Proof of Concept (POC) के तौर पर किया जा रहा है। यनी पहले छोटे स्तर पर जांच, फिर आगे फैसला।पहले ही हो चुका है सॉफ्ट लॉन्च

इस महीने की शुरुआत में

अहमदाबाद में 25 लाभार्थियों के साथ इसका सॉफ्ट लॉन्च किया गया था।अधिकारियों के अनुसार,

अब तक 2,000 से ज्यादा सफल ट्रांजैक्शन पूरे हो चुके हैं। यह संकेत है कि सिस्टम जमीन पर काम कर सकता है।

गुजरात में किन जिलों को चुना गया?

अगले महीने शुरू होने वाले पायलट में आनंद, साबरमती और दाहोद जिलों को शामिल किया गया है। वहीं चंडीगढ़ और पुडुचेरी में पहले से

DBT (Direct Benefit Transfer) सिस्टम चल रहा है ,जहां अनाज की जगह सीधे पैसे ट्रांसफर होते हैं।

सिर्फ राशन के लिए ही होगा इस्तेमाल डिजिटल फूड करेंसी की सबसे बड़ी खासियत यही है। इससे मिलने वाली सब्सिडी का उपयोग

सिर्फ अनाज खरीदने में ही किया जा सकेगा।

किसी और काम में नहीं। यही वजह है कि सरकार इसे ज्यादा सुरक्षित और कंट्रोल्ड मान रही है।

राशन कहां से मिलेगा?

जहां राशन दुकानें नहीं हैं, वहांस रकार कुछ खास आउटलेट्स को चिन्हित करने पर विचार कर रही है।इन दुकानों पर मिलने वाला अनाज

FCI या राज्य सरकार की एजेंसियों द्वारा सप्लाई किया जाएगा फीचर फोन वालों के लिए भी विकल्प

सरकार यह भी सोच रही है कि जिन लाभार्थियों के पास स्मार्टफोन नहीं है,या जो ई-वॉलेट इस्तेमाल नहीं कर पाते,वे भी इस योजना से वंचित न रहें।इसके लिए अलग तकनीकी विकल्प तैयार किए जा रहे हैं।

निष्कर्ष

डिजिटल फूड कूपन योजना मुफ्त राशन व्यवस्था को ज्यादा सरल, तेज और भरोसेमंद बना सकती है। अगर यह पायलट सफल रहा,तो आने वाले समय में पूरे देश में राशन लेने का तरीका बदल सकता है।

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