CBSE और NCERT का नया AI पाठ्यक्रम: तीसरी से आठवीं कक्षा तक लागू, देखें official guidelines

CBSE और NCERT का नया AI पाठ्यक्रम: तीसरी से आठवीं कक्षा तक लागू, देखें official guidelines

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने तीसरी से आठवीं कक्षा तक AI और कम्प्यूटेशनल थिंकिंग को स्कूलों के पाठ्यक्रम में शामिल करने की नई पहल शुरू की है। नए शैक्षणिक सत्र से, कक्षा 3-5 में एआई को गणित, भाषा और सामाजिक अध्ययन जैसे विषयों के साथ जोड़ा जाएगा, जबकि कक्षा 6-8 में कोडिंग, रोबोटिक्स और कंप्यूटर प्रोजेक्ट्स के जरिए व्यावहारिक ज्ञान दिया जाएगा।

इस पहल का उद्देश्य बच्चों को शुरुआती स्तर से ही AI के बुनियादी सिद्धांत समझने और तार्किक सोच विकसित करने का अवसर देना है।

2. पाठ्यक्रम और किताबें जारी, ऑनलाइन process से आसान पहुँच

एक अप्रैल से शुरू हुए नए सत्र के साथ ही छठवीं कक्षा की AI पाठ्यपुस्तक और पूरा पाठ्यक्रम तैयार कर दिया गया। शिक्षा मंत्रालय ने official details के तहत इसे सभी भाषाओं में उपलब्ध कराने और राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद के साथ साझा करने के निर्देश दिए हैं।

अब बच्चे और शिक्षक दोनों online process के जरिए पाठ्यक्रम और सामग्री तक आसानी से पहुँच सकते हैं।

3. शिक्षा मंत्री ने CBSE और NCERT को दिए स्पष्ट निर्देश

इस मौके पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने CBSE और NCERT को निर्देश दिए कि AI और कम्प्यूटेशनल थिंकिंग के पाठ्यक्रम को सभी भाषाओं में तैयार किया जाए और इसे धीरे-धीरे सभी स्कूलों में लागू किया जाए।

उन्होंने जोर दिया कि तेजी से बदलती दुनिया में बच्चों को AI और Computational Thinking जैसे विषयों का ज्ञान देना बेहद जरूरी है।

4. फाउंडेशन से व्यावहारिक ज्ञान तक: सटीक पाठ्यक्रम

कक्षा 3-5 (Foundation Stage): AI को अलग विषय के बजाय गणित, भाषा, सामाजिक और पर्यावरण अध्ययन में शामिल किया जाएगा।

कक्षा 6-8: AI के बुनियादी सिद्धांत, कोडिंग, रोबोटिक्स और प्रोजेक्ट आधारित सीखाई होगी।

पढ़ाई साल में 5-8 घंटे के बीच होगी, जिससे बच्चे धीरे-धीरे समझ और कौशल विकसित कर सकें।

शिक्षा मंत्री ने कहा कि AI आने से नौकरियों पर असर पड़ सकता है, लेकिन जो लोग तार्किक और कंप्यूटेशनल क्षमता रखते हैं, उनके लिए नए अवसर खुलेंगे।

5. शिक्षकों का प्रशिक्षण और government benefits

इस पहल के तहत शिक्षकों को पहले प्रशिक्षित किया जाएगा। इसके लिए handbook और training modules जारी किए गए हैं।

इस कदम से बच्चों को early exposure मिलेगा और शिक्षक AI शिक्षण में दक्ष बनेंगे। सरकार की यह official announcement न केवल कौशल विकास पर जोर देती है, बल्कि इसे डिजिटल और पारदर्शी बनाने का भी प्रयास है।

6. निष्कर्ष: भविष्य की तैयारियों की दिशा

कुल मिलाकर, यह पहल बच्चों को भविष्य की digital economy और AI-driven दुनिया के लिए तैयार करेगी। गणित और भाषा जैसे पारंपरिक विषयों के साथ AI और Computational Thinking सीखने से उन्हें तार्किक क्षमता, समस्या समाधान और नवाचार में बढ़त मिलेगी।

Important guidelines और eligibility details अब स्कूल और शिक्षा मंत्रालय के प्लेटफॉर्म पर आसानी से उपलब्ध हैं।

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