Online Process से मिलेगा पूरा हक: 80 करोड़ लोगों के लिए नई डिजिटल राशन व्यवस्था

Online Process से मिलेगा पूरा हक: 80 करोड़ लोगों के लिए नई डिजिटल राशन व्यवस्था

क्या आपने कभी राशन की दुकान पर कम तौल या “स्टॉक नहीं आया” जैसी बातें सुनी हैं? अब ऐसी शिकायतों पर लगाम लगने वाली है। केंद्र सरकार सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) में बड़ा बदलाव करने जा रही है। यह latest update करीब 80 करोड़ लोगों से जुड़ा है।

नई व्यवस्था में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से पूरे सिस्टम को डिजिटल निगरानी में लाया जाएगा। लक्ष्य साफ है—पारदर्शिता, समय पर वितरण और हर पात्र परिवार को उसका पूरा हक।

क्या बदलने वाला है? जानिए official details

सरकार “स्मार्ट पीडीएस” नाम के एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम कर रही है। इसमें अनाज की खरीद से लेकर गोदाम, ढुलाई और राशन दुकान तक हर चरण ऑनलाइन ट्रैक होगा।

अब कागज़ी रिकॉर्ड की जगह रियल-टाइम डेटा होगा। किस राज्य में कितना स्टॉक है? कहाँ कमी है? किस दुकान पर कितना वितरण हुआ? सब कुछ सिस्टम में दर्ज रहेगा।

इसका सीधा असर क्या होगा?

कम तौल की शिकायत घटेगी

देरी कम होगी

जिम्मेदारी तय करना आसान होगा

तकनीक का प्रदर्शन हाल ही में नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित एआई समिट में किया गया। वहां दिखाया गया कि कैसे डिजिटल मॉनिटरिंग से सरकारी योजनाएँ ज्यादा भरोसेमंद बन सकती हैं।

‘अन्न चक्र’ से तेज होगी सप्लाई

ढुलाई अक्सर सबसे कमजोर कड़ी होती है। कहीं ट्रक देर से पहुंचे, कहीं रास्ता लंबा पड़ गया।

इसी के लिए “अन्न चक्र” प्रणाली लाई जा रही है। यह उपलब्ध भंडार, जरूरत और मार्ग का विश्लेषण करेगी। यानी अनाज किस रूट से भेजना सही रहेगा, सिस्टम खुद सुझाव देगा।

इससे समय और खर्च दोनों बचेंगे। और सबसे अहम—लोगों तक राशन जल्दी पहुंचेगा।

‘अन्नपूर्णा मशीन’ से सही तौल की गारंटी

राशन लेने वालों के लिए सबसे बड़ा बदलाव “अन्नपूर्णा अनाज मशीन” हो सकती है।

यह मशीन पहचान सत्यापन के बाद तय मात्रा में अनाज खुद देगी। मतलब न कम तौल, न बहाना। जितना हक है, उतना मिलेगा।

साथ ही, गुणवत्ता जांच के लिए भी स्वचालित सिस्टम लगाया जाएगा। कुछ ही मिनटों में दाने की नमी और क्वालिटी की जांच संभव होगी। इससे किसानों को सही भुगतान और उपभोक्ताओं को बेहतर अनाज मिलेगा।

शिकायत और सब्सिडी प्रक्रिया भी होगी आसान

नई डिजिटल व्यवस्था में शिकायत दर्ज कराने के लिए बहुभाषी मंच तैयार किया गया है। सब्सिडी दावों की जांच भी स्कैन सिस्टम से होगी, ताकि भुगतान में देरी न हो।

जो लोग eligibility को लेकर असमंजस में रहते हैं, उनके लिए भी ऑनलाइन रिकॉर्ड मददगार होगा। भविष्य में online process और अधिक सरल होने की उम्मीद है।

सरकार इसे एक तरह का official announcement मान रही है, जिसका मकसद सिर्फ तकनीक दिखाना नहीं बल्कि government benefits को सही लोगों तक पहुंचाना है।

क्यों जरूरी था यह बदलाव?

इतने बड़े देश में राशन व्यवस्था संभालना आसान नहीं। छोटे-छोटे स्तर पर गड़बड़ियाँ पूरी चेन को प्रभावित करती हैं।

AI आधारित निगरानी से डेटा तुरंत सामने होगा। निर्णय भी तेजी से लिए जा सकेंगे। यह सिर्फ सिस्टम अपडेट नहीं, बल्कि भरोसे की बहाली की कोशिश है।

निष्कर्ष

अगर यह योजना जमीन पर सही ढंग से लागू हुई, तो सार्वजनिक वितरण प्रणाली में बड़ा सुधार देखने को मिल सकता है। कम तौल, देरी और बहानेबाजी जैसी पुरानी समस्याओं पर काबू पाया जा सकेगा।

आने वाले समय में यह मॉडल दूसरी सरकारी योजनाओं के लिए भी उदाहरण बन सकता है। फिलहाल, देश के करोड़ों परिवारों की नजर इस नई पहल पर टिकी है।

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