Net Zero Target की ओर बड़ी छलांग! World Bank और SBI की नई सोलर डील से क्या बदलेगा?

Net Zero Target की ओर बड़ी छलांग! World Bank और SBI की नई सोलर डील से क्या बदलेगा?

नेट ज़ीरो की ओर बड़ा कदम: वर्ल्ड बैंक–SBI सोलर प्लान से तेज़ होगी रूफटॉप क्रांति भारत ने साफ ऊर्जा की दिशा में एक और मजबूत कदम बढ़ाया है। Latest update के मुताबिक, देश के रूफटॉप सोलर मिशन को अब वैश्विक स्तर पर बड़ा सहारा मिला है। वाशिंगटन से आई official announcement बताती है कि वर्ल्ड बैंक ग्रुप की गारंटी शाखा ने करीब 19.8 करोड़ डॉलर की गारंटी मंजूर की है। साफ शब्दों में समझें तो यह फैसला उन फैक्ट्रियों और दफ्तरों के लिए अच्छी खबर है जो अपनी छत पर सोलर लगाकर बिजली का खर्च कम करना चाहते हैं।

क्या है पूरा मास्टरप्लान? (Official Details)

यह गारंटी पांच साल के लिए है। इसका मकसद भारतीय स्टेट बैंक (SBI) को दिए गए 500 मिलियन डॉलर के पुराने कर्ज को रिफाइनेंस करना है। जब किसी बैंक को अंतरराष्ट्रीय गारंटी मिलती है, तो उसके लिए पैसा जुटाना सस्ता हो जाता है। इसका सीधा फायदा सोलर प्रोजेक्ट्स को मिलता है। ब्याज कम, प्रक्रिया आसान और निवेश सुरक्षित। इस पूरी डील में मल्टीलेटरल इन्वेस्टमेंट गारंटी एजेंसी (MIGA) ने अहम भूमिका निभाई है। गारंटी सिटी बैंक को दी गई, और सिटी बैंक ने एसबीआई को फंडिंग उपलब्ध कराई। यह मॉडल पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप की एक मजबूत मिसाल बन रहा है।

किन्हें मिलेगा फायदा? (Eligibility & Impact)

सबसे बड़ा लाभ कमर्शियल और इंडस्ट्रियल सेक्टर को होगा। जिन फैक्ट्रियों की बिजली खपत ज्यादा है जिन ऑफि स बिल्डिंग्स की बड़ी छतें खाली पड़ी हैं वे कंपनियां जो अपने कार्बन फुटप्रिंट को घटाना चाहती हैं रूफटॉप सोलर लगाने से दो फायदे साफ दिखते हैं बिजली बिल में कमी कोयले से बनने वाली महंगी बिजली पर निर्भरता कम यानी सीधा आर्थिक और पर्यावरणीय लाभ।

SBI का ग्रीन फोकस

सरकार ने एसबीआई को निर्देश दिया है कि वह अपने कुल लोन का कम से कम 7.5% हिस्सा ग्रीन फाइनेंसिंग में लगाए। एसबीआई ने रूफटॉप सोलर फाइनेंसिंग की शुरुआत 2016 में ही कर दी थी। तब यह एक प्रयोग जैसा था। आज यह एक स्थापित मॉडल बन चुका है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस प्रोग्राम के तहत अब तक 1004 मेगावाट से ज्यादा सोलर क्षमता स्थापित हो चुकी है। यह आंकड़ा बताता है कि इंडस्ट्री अब सौर ऊर्जा को गंभीरता से ले रही है।

ऑनलाइन प्रोसेस और जरूरी गाइडलाइंस

जो कंपनियां इस तरह के प्रोजेक्ट में निवेश करना चाहती हैं, उनके लिए अब online process पहले से अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित है। कुछ important guidelines इस प्रकार हैं ग्रिड से कनेक्टेड सिस्टम होना चाहिए तकनीकी मानकों का पालन जरूरी वित्तीय पात्रता (eligibility) की जांच बैंक और ऊर्जा एजेंसियों से अनुमोदन इन प्रक्रियाओं को आसान बनाने के लिए सरकारी एजेंसियां लगातार डिजिटल प्लेटफॉर्म मजबूत कर रही हैं।

क्यों अहम है यह कदम?

भारत ने 2070 तक नेट ज़ीरो का लक्ष्य रखा है। ऐसे में रूफटॉप सोलर जैसे प्रोजेक्ट सिर्फ बिजली उत्पादन नहीं, बल्कि लंबी रणनीति का हिस्सा हैं। जब बैंक, अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां और निजी कंपनियां एक साथ काम करती हैं, तो जोखिम कम होता है। निवेश बढ़ता है। और सरकार को भी बड़े स्तर पर government benefits पहुंचाने में मदद मिलती है।

निष्कर्ष

यह सिर्फ 19.8 करोड़ डॉलर की गारंटी नहीं है। यह भरोसे की गारंटी है। साफ ऊर्जा की दिशा में भारत अब प्रयोग के दौर से आगे बढ़ चुका है। इंडस्ट्री तैयार है। बैंक तैयार हैं। और अंतरराष्ट्रीय सहयोग भी मिल रहा है। अगर यही रफ्तार बनी रही, तो आने वाले सालों में छतों पर लगे सोलर पैनल आम दृश्य होंगे — और बिजली बिल का बोझ धीरे-धीरे इतिहास बन सकता है।

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