PM सूर्य घर योजना में बड़ा खुलासा! क्यों अटक रहे हैं हजारों सोलर आवेदन? जानिए सच्चाई

PM सूर्य घर योजना में बड़ा खुलासा! क्यों अटक रहे हैं हजारों सोलर आवेदन? जानिए सच्चाई

PM सूर्य घर योजना: क्यों धीमी पड़ी रूफटॉप सोलर की रफ्तार देश में सोलर को लेकर उत्साह कम नहीं है। लेकिन ज़मीन पर तस्वीर थोड़ी अलग दिख रही है। PM सूर्य घर योजना के तहत रूफटॉप सोलर लगाने की रफ्तार उम्मीद से धीमी चल रही है। वजह? लोन में देरी, आवेदन लंबित और कुछ राज्यों में सीमित समर्थन। यह बात हाल की रिपोर्ट्स और official details से साफ होती है।

क्या है योजना का मकसद?

फरवरी 2024 में शुरू हुई इस योजना का लक्ष्य साफ था — घरों की छत पर सोलर पैनल लगवाकर बिजली बिल कम करना और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देना। सरकार स्थापना लागत का लगभग 40% तक सब्सिडी देती है। यह कदम 2030 तक 500 गीगावाट क्लीन एनर्जी क्षमता हासिल करने की बड़ी योजना का हिस्सा है। सुनने में योजना आकर्षक लगती है। government benefits भी स्पष्ट हैं। लेकिन ground level पर challenges सामने आ रहे हैं।

Target और Reality में कितना फर्क?

आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक अब तक करीब 23.6 लाख घरों में रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन हो चुका है। मार्च तक 40 लाख का लक्ष्य रखा गया था। योजना पोर्टल पर लगभग 60% आवेदन अभी भी लंबित हैं। करीब 7% आवेदन रिजेक्ट भी हुए हैं। यह latest update कई आवेदकों के लिए चिंता का कारण बना है।

सबसे बड़ी रुकावट: बैंक लोन

योजना का online process कुछ इस तरह है:घरेलू उपभोक्ता रजिस्टर्ड वेंडर के जरिए आवेदन करता है। वेंडर बैंक से लोन की व्यवस्था करता है। इंस्टॉलेशन के बाद सब्सिडी सीधे लोन खाते में जाती है। लेकिन यहीं पर अड़चन आ रही है। कई बैंकों ने दस्तावेज अधूरे होने या क्रेडिट स्कोर को लेकर आवेदन रोके हैं। कुछ मामलों में लोन अस्वीकार भी हुए हैं। बैंकों का तर्क है कि यदि लोन डिफॉल्ट हो जाए तो सोलर पैनल की resale value बहुत ज्यादा नहीं होती। इसलिए सख्त जांच की जा रही है।

राज्यों में अलग-अलग स्थिति

कुछ राज्यों में स्थिति और जटिल है। उदाहरण के तौर पर, कहीं बिजली बिल बकाया होने पर आवेदन अटक जाता है। कहीं जमीन का मालिकाना हक अभी भी परिवार के दिवंगत सदस्य के नाम है। हालांकि recent official announcement के बाद कुछ नियम आसान किए गए हैं। अब सह-आवेदक की अनुमति और दस्तावेज़ीकरण में सरलता दी जा रही है।

Collateral की मांग भी बनी समस्या

योजना की important guidelines के अनुसार छोटे लोन पर संपार्श्विक (collateral) जरूरी नहीं है। फिर भी कुछ बैंक ₹2 लाख से कम के लोन पर भी गारंटी मांग रहे हैं। इससे कई आवेदकों की eligibility प्रभावित हो रही है और स्वीकृति की रफ्तार धीमी पड़ रही है।

बिजली कंपनियों की चिंता

एक और दिलचस्प पहलू सामने आया है। रूफटॉप सोलर अपनाने वाले अधिकतर उपभोक्ता वे हैं जो ज्यादा बिजली खर्च करते हैं। जब ऐसे घर अपनी बिजली खुद बनाने लगते हैं, तो राज्य की वितरण कंपनियों को राजस्व में कमी का डर रहता है। इसी वजह से कुछ क्षेत्रों में सोलर को लेकर सक्रिय प्रचार कम देखने को मिला है।

आगे क्या?

सरकार का दावा है कि 30 लाख से अधिक घर इस योजना से लाभान्वित हो चुके हैं। इंस्टॉलेशन की रफ्तार भी धीरे-धीरे बढ़ रही है। फिर भी साफ है कि loan approval, eligibility clarity और राज्यों के सहयोग में सुधार जरूरी है। अगर बैंकिंग प्रक्रिया सरल हो जाए और guidelines जमीन पर ठीक से लागू हों, तो यह योजना सच में लाखों घरों का बिजली बिल कम कर सकती है।

निष्कर्ष

PM सूर्य घर योजना की सोच मजबूत है। सब्सिडी आकर्षक है। online process भी मौजूद है। लेकिन लोन स्वीकृति में देरी, दस्तावेज़ी जटिलता और राज्यों में असमान समर्थन इसकी गति को प्रभावित कर रहे हैं। आने वाले महीनों में यदि इन चुनौतियों का समाधान होता है, तो यह योजना भारत की सोलर क्रांति में बड़ा बदलाव ला सकती है।

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