UP: 25 मार्च तक मानव संपदा पोर्टल पर अपलोड करें अवकाश विवरण, सरकार ने जारी की नई गाइडलाइन

UP: 25 मार्च तक मानव संपदा पोर्टल पर अपलोड करें अवकाश विवरण, सरकार ने जारी की नई गाइडलाइन

उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य कर्मचारियों के लिए एक अहम निर्देश जारी किया है। अब सभी सरकारी कर्मचारियों को अपने अवकाश से जुड़ा पूरा विवरण 25 मार्च तक ‘मानव संपदा पोर्टल’ पर अपलोड करना अनिवार्य होगा। यह कदम प्रशासनिक कामकाज को डिजिटल और पारदर्शी बनाने की दिशा में उठाया गया है।

सरकार के official details के अनुसार, कर्मचारियों का पूरा डेटा पोर्टल पर दर्ज होना जरूरी है ताकि छुट्टियों से जुड़ी प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन और व्यवस्थित तरीके से संचालित की जा सके।

2. ऑनलाइन प्रक्रिया से होगी अवकाश की स्वीकृति

कार्मिक विभाग की ओर से जारी important guidelines में स्पष्ट कहा गया है कि सभी कर्मचारियों और अधिकारियों का पंजीकरण मानव संपदा पोर्टल पर 100 प्रतिशत पूरा होना चाहिए।

इसके बाद अवकाश से जुड़ी हर प्रक्रिया—चाहे आवेदन हो या मंजूरी—online process के माध्यम से ही की जाएगी।

इस काम की जिम्मेदारी संबंधित विभागों के आहरण-वितरण अधिकारी (DDO) को दी गई है, जिन्हें सुनिश्चित करना होगा कि उनके विभाग के सभी कर्मचारियों का अवकाश रिकॉर्ड समय सीमा के भीतर पोर्टल पर अपडेट हो जाए।

3. निवेश और संपत्ति की जानकारी देना भी होगा अनिवार्य

सरकार ने कर्मचारियों के वित्तीय लेनदेन को लेकर भी नई पारदर्शी व्यवस्था लागू की है। अब यदि कोई सरकारी कर्मचारी एक साल में अपने मूल वेतन के छह महीने से अधिक राशि शेयर, स्टॉक या अन्य निवेश में लगाता है, तो उसे इसकी सूचना अपने संबंधित प्राधिकारी को देना जरूरी होगा।

इसी तरह यदि कोई कर्मचारी दो महीने के मूल वेतन से अधिक मूल्य की चल संपत्ति खरीदता है—जैसे वाहन या महंगा उपकरण—तो उसकी जानकारी भी विभाग को देनी होगी।

सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से financial transparency बढ़ेगी और कर्मचारियों की संपत्ति संबंधी जानकारी व्यवस्थित रूप से दर्ज हो सकेगी।

4. हर साल देनी होगी अचल संपत्ति की जानकारी

नई व्यवस्था के तहत अब सभी कर्मचारियों को हर साल अपनी अचल संपत्ति (जमीन, मकान आदि) की जानकारी भी देनी होगी।

कार्मिक विभाग के अनुसार यह कदम सरकारी व्यवस्था में जवाबदेही बढ़ाने और प्रशासन को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए उठाया गया है।

इससे सरकार को कर्मचारियों की संपत्ति का अपडेट रिकॉर्ड मिलता रहेगा और भविष्य में किसी तरह की विसंगति की संभावना भी कम होगी।

5. सिविल जज पदोन्नति नियमों में भी बड़ा बदलाव

राज्य सरकार ने न्यायिक सेवा से जुड़ी पदोन्नति प्रक्रिया में भी संशोधन किया है। नए official rules के अनुसार अब सिविल जज (सीनियर डिवीजन) से पदोन्नति का कोटा 65 प्रतिशत से घटाकर 50 प्रतिशत कर दिया गया है।

इसके साथ ही सीमित विभागीय प्रतियोगी परीक्षा के माध्यम से पदोन्नति का कोटा 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 25 प्रतिशत कर दिया गया है।

6. पदोन्नति के लिए Eligibility क्या होगी

नई व्यवस्था के तहत वही सिविल जज इस परीक्षा में शामिल हो सकेंगे जो:

सिविल जज (सीनियर डिवीजन) के पद पर कम से कम 3 वर्ष की सेवा पूरी कर चुके हों

और उत्तर प्रदेश न्यायिक सेवा में कुल 7 वर्ष की सेवा पूरी कर चुके हों

हालांकि अधिवक्ताओं (बार) से सीधी भर्ती का कोटा पहले की तरह 25 प्रतिशत ही रहेगा।

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