UP Board Evaluation Rule: कॉपियां जांचने को लेकर नया नियम लागू, गलती करने पर होगी सख्त कार्रवाई

UP Board Evaluation Rule: कॉपियां जांचने को लेकर नया नियम लागू, गलती करने पर होगी सख्त कार्रवाई

उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षाओं के मूल्यांकन को लेकर अब नया नियम लागू किया गया है। ताजा official announcement के अनुसार, अब जिस माध्यम में छात्र ने परीक्षा लिखी है, उसी माध्यम के शिक्षक उसकी उत्तरपुस्तिका की जांच करेंगे।

खास तौर पर अंग्रेजी माध्यम में लिखी गई कॉपियों के मूल्यांकन के लिए अलग व्यवस्था बनाई गई है। बोर्ड का मानना है कि इससे मूल्यांकन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और सटीक हो सकेगी।

2. अंग्रेजी माध्यम की कॉपियां केवल अंग्रेजी परीक्षक ही जांचेंगे 

बोर्ड सचिव ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अंग्रेजी माध्यम की उत्तरपुस्तिकाओं की जांच केवल अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाने वाले परीक्षक ही करेंगे।

इसके लिए मूल्यांकन केंद्रों पर अंग्रेजी माध्यम की कॉपियों को अलग बंडल में रखा जा रहा है, ताकि जांच के दौरान किसी प्रकार की गड़बड़ी न हो।

जिला विद्यालय निरीक्षकों (DIOS) को भी निर्देश दिए गए हैं कि इस व्यवस्था को सख्ती से लागू किया जाए।

3. अगर गलती हुई तो जिम्मेदारी तय होगी (Important Guidelines)

बोर्ड ने यह भी साफ कर दिया है कि यदि मूल्यांकन के दौरान नियमों का उल्लंघन होता है, तो संबंधित परीक्षक और उप प्रधान परीक्षक (DHE) को जिम्मेदार माना जाएगा।

ऐसी स्थिति में उनके खिलाफ उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) अधिनियम के तहत कार्रवाई भी हो सकती है।

यानी अब कॉपियों की जांच में किसी भी प्रकार की लापरवाही को गंभीरता से लिया जाएगा।

4. कितने छात्रों ने चुना अंग्रेजी माध्यम?

इस साल यूपी बोर्ड परीक्षा में बड़ी संख्या में छात्रों ने अंग्रेजी माध्यम से परीक्षा दी है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार:

हाईस्कूल: 1,39,049 छात्र-छात्राएं

इंटरमीडिएट: 1,19,185 छात्र-छात्राएं

इतनी बड़ी संख्या को देखते हुए बोर्ड ने अलग से मूल्यांकन व्यवस्था लागू की है।

5. अगर कॉपी गलत बंडल में मिल जाए तो क्या होगा?

कभी-कभी मूल्यांकन के दौरान अलग-अलग माध्यम की कॉपियां एक ही बंडल में आ जाती हैं। ऐसे मामलों के लिए भी बोर्ड ने स्पष्ट important guidelines जारी की हैं।

यदि सामान्य बंडल में अंग्रेजी माध्यम की कॉपी मिलती है तो:

हिंदी माध्यम का परीक्षक उसे जांच नहीं करेगा

कॉपी को अलग रखकर अंग्रेजी परीक्षक को भेजा जाएगा

अगर किसी केंद्र पर अंग्रेजी माध्यम के परीक्षक उपलब्ध नहीं हैं, तो जिला विद्यालय निरीक्षक दूसरे केंद्र या अंग्रेजी माध्यम स्कूलों से योग्य शिक्षक नियुक्त कर सकते हैं।

6. मूल्यांकन में अनुपस्थित रहने पर भी होगी कार्रवाई

बोर्ड को यह शिकायत भी मिलती रही है कि कई शिक्षक मूल्यांकन के लिए नियुक्त होने के बावजूद केंद्र पर नहीं पहुंचते।

इसे ध्यान में रखते हुए अब सभी सरकारी, सहायता प्राप्त और स्ववित्तपोषित विद्यालयों के शिक्षकों के लिए मूल्यांकन कार्य में उपस्थित रहना अनिवार्य किया गया है।

यदि कोई शिक्षक बिना उचित कारण अनुपस्थित रहता है, तो इसे कर्तव्य की उपेक्षा माना जाएगा और उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

निष्कर्ष

यूपी बोर्ड ने परीक्षा मूल्यांकन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए यह नया नियम लागू किया है। अब जिस माध्यम में छात्र ने परीक्षा लिखी है, उसी माध्यम के शिक्षक उसकी कॉपी जांचेंगे।

इस कदम से उम्मीद है कि मूल्यांकन अधिक निष्पक्ष होगा और छात्रों को उनके प्रदर्शन के अनुसार सही अंक मिल सकेंगे। साथ ही, नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई से व्यवस्था में अनुशासन भी बढ़ेगा।

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