भारत की जनगणना 2027: घर और परिवार की कोडिंग कैसे होती है? समझें पूरा प्रोसेस
जनगणना का नाम सुनते ही अक्सर लोगों के मन में सवाल आता है—आखिर ये कोडिंग कैसे होती है? घर पर आने वाले अधिकारी दरवाजे पर नंबर क्यों लिखते हैं? अगर आप भी यही सोचते हैं, तो इसे आसान भाषा में समझ लेते हैं।
जनगणना सिर्फ गिनती नहीं है, बल्कि हर घर और परिवार की सही पहचान बनाने की एक व्यवस्थित प्रक्रिया है। यही वजह है कि इसमें कोडिंग का खास महत्व होता है।
भवन और मकान की नंबरिंग कैसे होती है?
सबसे पहले बात होती है भवन यानी बिल्डिंग की। हर अलग भवन को एक सीरियल नंबर दिया जाता है—जैसे 1, 2, 3…। यह नंबर उस इलाके के हिसाब से क्रम में चलता है, ताकि बाद में किसी भी घर को पहचानना आसान हो।
अब एक ही भवन के अंदर एक से ज्यादा “जनगणना मकान” हो सकते हैं। उदाहरण के लिए, अगर एक बिल्डिंग में तीन किराएदार अलग-अलग रह रहे हैं, तो हर यूनिट को अलग कोड मिलेगा। यह कोड आमतौर पर चार अंकों का होता है—जैसे 0001, 0002…
यहां मकानों को दो हिस्सों में बांटा जाता है:
आवासीय (Residential) – जहां लोग रहते हैं
गैर-आवासीय (Non-Residential) – जैसे दुकान, ऑफिस, मंदिर आदि
परिवार (Household) की पहचान कैसे होती है?
अब सबसे जरूरी हिस्सा आता है—परिवार की पहचान। एक ही मकान में एक या एक से ज्यादा परिवार रह सकते हैं।
यहां एक आसान नियम होता है:
👉 जो लोग एक ही रसोई से खाना खाते हैं, उन्हें एक परिवार माना जाता है।
👉 अगर एक मकान में अलग-अलग रसोई हैं, तो हर समूह अलग परिवार गिना जाएगा।
हर परिवार को भी एक यूनिक नंबर दिया जाता है, जैसे 001, 002… जिससे डेटा व्यवस्थित रहता है।
परिवार के प्रकार और खास बातें
जनगणना में परिवार को दो मुख्य श्रेणियों में बांटा जाता है:
1. सामान्य परिवार (Normal Household)
जैसे हम और आप अपने घर में रहते हैं—माता-पिता, बच्चे, दादा-दादी।
2. संस्थागत परिवार (Institutional Household)
जैसे हॉस्टल, अस्पताल, आश्रम या जेल, जहां लोग समूह में रहते हैं। इनका कोड अलग होता है, अक्सर 999 से दर्शाया जाता है।
कुछ खास बातें भी ध्यान रखने लायक हैं:
हर मकान में परिवार हो, यह जरूरी नहीं (खाली घर या दुकान हो सकती है)।
बेघर (Homeless) लोग भी जनगणना में शामिल होते हैं, भले वे किसी मकान में न रहते हों।