प्रधानाध्यापक और शिक्षक के विवाद में पिस रहे मासूम बच्चे, स्कूल में पढ़ाई ठप होने से अभिभावकों में नाराजगी

प्रधानाध्यापक और शिक्षक के विवाद में पिस रहे मासूम बच्चे, स्कूल में पढ़ाई ठप होने से अभिभावकों में नाराजगी

स्कूल वह जगह होती है जहां बच्चों का भविष्य संवरता है। जहां शिक्षक बच्चों को केवल किताबों का ज्ञान ही नहीं देते, बल्कि उन्हें जीवन जीने का तरीका भी सिखाते हैं। लेकिन जब उसी स्कूल में शिक्षक आपसी विवाद में उलझ जाएं, तो सबसे बड़ा नुकसान उन बच्चों का होता है जो बेहतर शिक्षा की उम्मीद लेकर रोज स्कूल पहुंचते हैं। राजधानी लखनऊ के मदारपुर कम्पोजिट बेसिक विद्यालय से सामने आया मामला भी कुछ ऐसा ही है, जहां प्रधानाध्यापक और एक शिक्षक के बीच लंबे समय से चल रहे विवाद का असर अब सीधे बच्चों की पढ़ाई पर पड़ने लगा है। स्कूल में पढ़ाई का माहौल बिगड़ता जा रहा है और अभिभावकों की चिंता लगातार बढ़ती दिखाई दे रही है।

गुरुवार को जब इस मामले की जांच करने के लिए शिक्षा विभाग के अधिकारी स्कूल पहुंचे, तब वहां का माहौल पूरी तरह तनावपूर्ण हो गया। अभिभावकों, ग्रामीणों और शिक्षकों के बीच तीखी बहस देखने को मिली। जांच के दौरान कई घंटे तक स्कूल परिसर में हंगामा और शोर-शराबा चलता रहा, जिससे बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह प्रभावित हुई। अभिभावकों का कहना था कि शिक्षक और प्रधानाध्यापक अपने निजी विवाद को खत्म करने के बजाय उसे लगातार बढ़ा रहे हैं, जिसका सीधा असर बच्चों के भविष्य पर पड़ रहा है। उनका कहना था कि बच्चे पढ़ने के लिए स्कूल आते हैं, लेकिन यहां रोज विवाद और तनाव का माहौल बना रहता है।

जानकारी के मुताबिक मदारपुर कम्पोजिट स्कूल में करीब 200 बच्चे पंजीकृत हैं। पिछले वर्ष पास के एक प्राइमरी स्कूल का विलय इस कम्पोजिट विद्यालय में किया गया था। विलय के बाद वहां के शिक्षकों का समायोजन भी इसी स्कूल में कर दिया गया। तभी से स्कूल के प्रधानाध्यापक और समायोजन में आए एक शिक्षक के बीच विवाद शुरू हो गया। धीरे-धीरे यह मामला इतना बढ़ गया कि दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय में शिकायत तक दर्ज करा दी। लंबे समय से चल रहे इस विवाद ने अब स्कूल के सामान्य माहौल को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है।

बीएसए के निर्देश पर मोहनलालगंज के खंड शिक्षा अधिकारी सुशील कनौजिया और नगर क्षेत्र के बीईओ धर्मेंद्र सिंह गुरुवार को जांच करने स्कूल पहुंचे थे। जांच के दौरान उन्होंने शिक्षकों, स्कूल प्रबंधन समिति के सदस्यों, अभिभावकों और बच्चों के बयान भी दर्ज किए। लेकिन जांच प्रक्रिया के दौरान ही माहौल गरमा गया। बड़ी संख्या में पहुंचे ग्रामीणों और अभिभावकों ने अधिकारियों के सामने नाराजगी जताई। लोगों का कहना था कि स्कूल में शिक्षा का स्तर लगातार गिरता जा रहा है और बच्चों की नियमित पढ़ाई बाधित हो रही है।

अभिभावकों की सबसे बड़ी चिंता बच्चों का भविष्य है। उनका कहना है कि सरकारी स्कूलों में पहले ही पढ़ाई को लेकर कई तरह की चुनौतियां रहती हैं। ऐसे में यदि शिक्षक आपसी विवाद में उलझ जाएंगे तो बच्चों का नुकसान कौन पूरा करेगा। कई अभिभावकों ने यह भी आरोप लगाया कि स्कूल में अनुशासन का माहौल खत्म होता जा रहा है। बच्चों के सामने शिक्षकों के बीच बहस और तनावपूर्ण स्थिति बनना कहीं न कहीं उनके मानसिक विकास को भी प्रभावित कर रहा है।

ग्रामीणों ने अधिकारियों से मांग की कि इस पूरे मामले का जल्द समाधान किया जाए ताकि स्कूल में दोबारा पढ़ाई का सामान्य माहौल बन सके। उनका कहना था कि यदि समय रहते इस विवाद को खत्म नहीं किया गया तो इसका असर बच्चों की शिक्षा पर लंबे समय तक पड़ सकता है। कई लोगों ने यह भी कहा कि गांव के गरीब और मध्यम वर्गीय परिवार अपने बच्चों को बेहतर भविष्य देने के लिए सरकारी स्कूलों पर भरोसा करते हैं। लेकिन जब स्कूलों में ही इस तरह के विवाद सामने आते हैं तो लोगों का भरोसा कमजोर होने लगता है।

शिक्षा विशेषज्ञों का भी मानना है कि स्कूलों में सकारात्मक माहौल होना बेहद जरूरी है। बच्चे वही सीखते हैं जो वे अपने आसपास देखते हैं। यदि शिक्षकों के बीच सम्मान और सहयोग की भावना होगी तो उसका अच्छा प्रभाव बच्चों पर भी पड़ेगा। लेकिन यदि स्कूल का वातावरण विवाद और तनाव से भरा होगा तो बच्चों की पढ़ाई के साथ-साथ उनका आत्मविश्वास भी प्रभावित हो सकता है। यही कारण है कि शिक्षा विभाग को ऐसे मामलों में तुरंत हस्तक्षेप कर समाधान निकालना चाहिए।

इस पूरे मामले ने एक बार फिर सरकारी स्कूलों की व्यवस्थाओं और आंतरिक समन्वय पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं होती, बल्कि यह बच्चों को बेहतर इंसान बनाने की प्रक्रिया भी है। ऐसे में शिक्षकों की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। उन्हें अपने व्यक्तिगत मतभेदों को बच्चों की पढ़ाई से दूर रखना चाहिए। क्योंकि स्कूल का हर दिन बच्चों के भविष्य से जुड़ा होता है और एक दिन की खराब पढ़ाई भी उनके सीखने की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है।

फिलहाल अभिभावकों और ग्रामीणों की नजर अब शिक्षा विभाग की कार्रवाई पर टिकी हुई है। सभी को उम्मीद है कि अधिकारी जल्द इस विवाद का समाधान निकालेंगे और स्कूल में दोबारा शांतिपूर्ण माहौल स्थापित होगा। बच्चों की शिक्षा किसी भी विवाद से बड़ी होती है और यही बात हर शिक्षक और अधिकारी को समझनी होगी। आखिरकार, एक बेहतर समाज की शुरुआत अच्छे स्कूल और सकारात्मक शिक्षा वातावरण से ही होती है।

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