सरकारी स्कूल में शिक्षकों की मनमानी का VIDEO वायरल, ग्रामीणों में फूटा गुस्सा; डीएम ने दिए जांच के आदेश

सरकारी स्कूल में शिक्षकों की मनमानी का VIDEO वायरल, ग्रामीणों में फूटा गुस्सा; डीएम ने दिए जांच के आदेश

उत्तर प्रदेश के आगरा जिले से सरकारी स्कूलों की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। खेरागढ़ तहसील के प्राथमिक विद्यालय महमदगढ़ का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में ग्रामीण स्कूल की बदहाल व्यवस्था और शिक्षकों की कथित लापरवाही पर नाराजगी जताते दिखाई दे रहे हैं। मामला सामने आने के बाद प्रशासन भी हरकत में आ गया है और जिलाधिकारी ने जांच के आदेश दे दिए हैं।

ग्रामीणों का आरोप है कि स्कूल में पढ़ाई का माहौल पूरी तरह बिगड़ चुका है। शिक्षक समय से स्कूल नहीं पहुंचते और बच्चों की पढ़ाई पर ध्यान देने के बजाय मोबाइल फोन में व्यस्त रहते हैं। बृहस्पतिवार को जब कुछ शिक्षक देर से स्कूल पहुंचे तो गांव के लोगों ने उनका वीडियो बनाना शुरू कर दिया। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच बहस भी हुई। ग्रामीणों का कहना है कि जब उन्होंने सवाल उठाए तो शिक्षकों ने बीमारी का हवाला दिया, लेकिन गांव वालों का आरोप है कि यह स्थिति लंबे समय से बनी हुई है।

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में कुछ शिक्षक ग्रामीणों को चुनौती देते भी नजर आए। वीडियो में कथित तौर पर कहा गया कि “जितने चाहो वीडियो बना लो, हमारा कुछ नहीं बिगड़ेगा।” इस बयान के बाद ग्रामीणों में और ज्यादा नाराजगी फैल गई। लोगों का कहना है कि अगर सरकारी शिक्षक ही इस तरह का रवैया अपनाएंगे तो बच्चों का भविष्य कैसे सुरक्षित रहेगा।

गांव के निवासी रवि, भागीरथ और बृजमोहन ने स्कूल की कई बड़ी समस्याओं को सामने रखा। उनका कहना है कि भीषण गर्मी के बावजूद विद्यालय में पीने के पानी की कोई उचित व्यवस्था नहीं है। बच्चे प्यास बुझाने के लिए गांव की टंकी तक जाने को मजबूर हैं। इतना ही नहीं, स्कूल का शौचालय भी बंद पड़ा है, जिसके कारण छोटे बच्चों को खेतों में जाना पड़ता है। ग्रामीणों ने मिड डे मील को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि बच्चों को तय मेनू के अनुसार फल और दूध कभी नहीं दिया जाता।

विद्यालय की सबसे चिंताजनक तस्वीर तब सामने आई जब पता चला कि पूरे स्कूल में सिर्फ एक ही कमरा है। इसी एक कमरे में कक्षा 1 से लेकर कक्षा 5 तक के सभी बच्चों को बैठाकर पढ़ाया जाता है। ग्रामीणों ने इसकी तुलना “भेड़-बकरियों की तरह बैठाने” से की। स्कूल परिसर में गंदगी और साफ-सफाई की कमी भी लोगों की नाराजगी की बड़ी वजह बनी हुई है।

ग्रामीणों ने खंड शिक्षा अधिकारी पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत के कारण शिक्षकों में कार्रवाई का कोई डर नहीं बचा है। लोगों का कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। यही कारण है कि अब गांव वालों ने वीडियो बनाकर सोशल मीडिया का सहारा लिया, ताकि उनकी आवाज प्रशासन तक पहुंच सके।

मामले ने तूल पकड़ने के बाद प्रशासन ने तुरंत संज्ञान लिया। खेरागढ़ के एसडीएम ऋषि राव ने इसे शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया है। उन्होंने नायब तहसीलदार अभिषेक कुमार को जांच अधिकारी नियुक्त करते हुए दो दिन के भीतर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं। एसडीएम ने साफ कहा है कि जांच रिपोर्ट जिलाधिकारी को भेजी जाएगी और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

इसके साथ ही प्रशासन ने क्षेत्र के अन्य सरकारी स्कूलों में भी आकस्मिक निरीक्षण अभियान चलाने की बात कही है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में कई विद्यालयों की वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।

सरकारी स्कूल गरीब और मध्यम वर्ग के बच्चों के भविष्य की सबसे बड़ी उम्मीद होते हैं। ऐसे में यदि स्कूलों में ही लापरवाही, अव्यवस्था और मनमानी का माहौल होगा तो इसका सबसे बड़ा नुकसान बच्चों की पढ़ाई और उनके भविष्य को होगा। आगरा के इस मामले ने एक बार फिर शिक्षा व्यवस्था की कमजोरियों को उजागर कर दिया है। अब लोगों की नजर प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी है कि क्या जांच के बाद सच में सुधार होगा या यह मामला भी सिर्फ फाइलों तक सीमित रह जाएगा।

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