बच्चों को पढ़ाएं या जनगणना कराएं? स्व-जनगणना के दबाव में शिक्षक परेशान, लोकेशन पकड़ने में छूट रहे पसीने
बरेली जिले में चल रहे स्व-जनगणना अभियान ने अब शिक्षकों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। एक तरफ स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई, परीक्षाएं और विभागीय काम पहले से ही शिक्षकों पर भारी हैं, वहीं दूसरी तरफ अब सेल्फ एन्यूमरेशन का लक्ष्य पूरा करने का दबाव भी लगातार बढ़ता जा रहा है।
प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों के मुताबिक प्रत्येक विद्यालय को तय समय सीमा के भीतर स्व-जनगणना का लक्ष्य पूरा करना है। बताया गया है कि 9 मई तक 20 मकानों और 15 मई तक 100 मकानों की सेल्फ एन्यूमरेशन कराने की जिम्मेदारी स्कूलों को दी गई है। इसके लिए शिक्षकों को घर-घर जाकर लोगों को जागरूक करना पड़ रहा है। कई जगह उन्हें ऑनलाइन प्रक्रिया समझानी पड़ रही है और परिवारों का डेटा भी भरवाना पड़ रहा है।
शिक्षकों का कहना है कि अब हालात ऐसे हो गए हैं कि समझ नहीं आ रहा कि बच्चों को पढ़ाएं या जनगणना का काम करें। विद्यालयों में पहले से ही शिक्षकों की कमी है। ऊपर से नामांकन अभियान, पोर्टल अपडेट, मिड-डे मील, परीक्षाएं और विभागीय रिपोर्टिंग जैसे कार्य लगातार चलते रहते हैं। ऐसे में नया दायित्व मिलने से पढ़ाई प्रभावित होने लगी है।
तकनीकी समस्याएं भी शिक्षकों की परेशानी का बड़ा कारण बन गई हैं। ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में मोबाइल नेटवर्क कमजोर होने से लोकेशन कैप्चर नहीं हो पा रही है। कई शिक्षकों ने बताया कि एक-एक परिवार का डेटा अपलोड करने में काफी समय लग जाता है। कभी ऐप काम नहीं करता तो कभी लोकेशन पकड़ने में घंटों लग जाते हैं। कई बार लोगों को समझाने और तकनीकी प्रक्रिया पूरी कराने में पूरा दिन निकल जाता है।
शिक्षक संगठनों से जुड़े पदाधिकारियों का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था पहले ही गैर-शैक्षणिक कार्यों के बोझ से दब चुकी है। लगातार नए प्रशासनिक कार्य दिए जाने से स्कूलों की शैक्षणिक गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। उनका कहना है कि यदि शिक्षकों को इसी तरह अन्य सरकारी अभियानों में लगाया जाता रहा तो बच्चों की पढ़ाई पर सीधा असर पड़ेगा।
कुछ शिक्षकों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि लक्ष्य पूरा न होने पर जवाबदेही तय करने की बात कही जा रही है। इससे मानसिक दबाव भी बढ़ रहा है। कई शिक्षक तनाव में काम कर रहे हैं क्योंकि उन्हें डर है कि लक्ष्य अधूरा रहने पर कार्रवाई हो सकती है।
हालांकि प्रशासन का कहना है कि स्व-जनगणना अभियान राष्ट्रीय महत्व का कार्य है और इसमें सभी विभागों का सहयोग जरूरी है। लेकिन शिक्षकों की मांग है कि शिक्षा व्यवस्था को प्रभावित किए बिना ऐसे अभियानों के लिए अलग व्यवस्था बनाई जाए, ताकि स्कूलों में पढ़ाई सुचारु रूप से चलती रहे।