अब खाली मकान भी सरकार की नजर में, जनगणना में हर बिल्डिंग को मिलेगा अलग कोड

अब खाली मकान भी सरकार की नजर में, जनगणना में हर बिल्डिंग को मिलेगा अलग कोड

देश में होने वाली आगामी जनगणना इस बार कई मायनों में अलग और अधिक डिजिटल होने जा रही है। अब सिर्फ लोगों की गिनती ही नहीं होगी, बल्कि हर मकान और भवन की अलग पहचान भी दर्ज की जाएगी। सरकार पहली बार ऐसी कोडिंग व्यवस्था लागू कर रही है, जिससे यह पता चल सकेगा कि कौन सा मकान रहने के लिए इस्तेमाल हो रहा है, कौन दुकान या अस्पताल है और कौन सा मकान लंबे समय से खाली पड़ा है।

 

संभल जिले में सात मई से स्वगणना प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और 22 मई से मकानों के सूचीकरण का काम तेज किया जाएगा। इस नई व्यवस्था के तहत हर भवन को उसके उपयोग के आधार पर विशेष कोड दिया जाएगा। इससे प्रशासन को गांव और शहर दोनों क्षेत्रों की वास्तविक स्थिति का डिजिटल रिकॉर्ड मिल सकेगा।

 

खाली मकानों को मिलेगा अलग कोड

 

नई व्यवस्था में खाली पड़े मकानों को भी अलग पहचान दी जाएगी। ऐसे भवनों को कोड (0) दिया जाएगा। यानी अब कोई भी खाली मकान सरकारी रिकॉर्ड से बाहर नहीं रहेगा। इससे यह पता लगाना आसान होगा कि किसी क्षेत्र में कितने घर खाली हैं और कितने उपयोग में हैं।

 

पूजा स्थलों के लिए भी अलग व्यवस्था बनाई गई है। मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा, चर्च जैसे धार्मिक स्थलों को अलग श्रेणी में रखते हुए कोड (8) दिया जाएगा। इससे धार्मिक और सार्वजनिक भवनों का अलग डेटा तैयार किया जा सकेगा।

 

आवासीय मकानों के लिए कोड (1)

 

जनगणना विभाग ने आवासीय भवनों के लिए कोड (1) तय किया है। इसमें झोपड़ी, अपार्टमेंट, कोठी, बंगला, तंबू, गैंगमैन की झोपड़ी और वनरक्षक या सैनिकों के रहने वाले ढांचे शामिल किए जाएंगे। यानी जहां लोग स्थायी या अस्थायी रूप से रह रहे हैं, उन सभी को आवासीय श्रेणी में रखा जाएगा।

 

इसके अलावा ऐसे मकान जहां लोग रहते भी हैं और साथ में दुकान, क्लिनिक, जिम या अन्य काम भी चलते हैं, उन्हें मिश्रित उपयोग की श्रेणी में रखा जाएगा। ऐसे भवनों को कोड (2) दिया जाएगा।

 

सरकार को मिलेगा सटीक डिजिटल डाटा

 

इस नई कोडिंग व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि प्रशासन को हर क्षेत्र की सही स्थिति का डाटा मिल सकेगा। इससे यह समझने में आसानी होगी कि किस इलाके में कितने घर खाली हैं, कितनी दुकानें हैं, कितने व्यावसायिक भवन हैं और कहां सार्वजनिक सुविधाओं की जरूरत है।

 

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में यही डाटा विकास योजनाओं, शहरी विस्तार और सरकारी सुविधाओं की योजना बनाने में मदद करेगा। जनगणना विभाग भी इस बार पूरी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और तकनीकी रूप से मजबूत बनाने की तैयारी में जुटा है।

जनगणना में हर भवन की होगी अलग पहचान, दुकान से अस्पताल तक सभी को मिलेगा कोड

 

देश में होने वाली नई जनगणना इस बार पूरी तरह अलग अंदाज में दिखाई देने वाली है। अब सिर्फ लोगों की संख्या नहीं गिनी जाएगी, बल्कि हर मकान और भवन का उपयोग भी डिजिटल रिकॉर्ड में दर्ज किया जाएगा। सरकार ने भवनों की पहचान के लिए विशेष कोडिंग व्यवस्था लागू की है, जिससे यह साफ पता चल सकेगा कि कौन सा भवन आवासीय है, कौन दुकान है, कौन स्कूल या अस्पताल है और कौन सा मकान खाली पड़ा हुआ है।

 

दुकान और कार्यालयों के लिए रहेगा कोड (3)

 

नई व्यवस्था के तहत दुकान और कार्यालय श्रेणी के भवनों को कोड (3) दिया जाएगा। इसमें जनरल स्टोर, मेडिकल स्टोर, रेस्टोरेंट, चाय की दुकान, फल और सब्जी की दुकान, ढाबा, कैंटीन, जलपान गृह, कॉफी हाउस और अन्य व्यापारिक प्रतिष्ठान शामिल होंगे।

 

कार्यालय श्रेणी में सरकारी दफ्तर, बैंक, बीमा कंपनियां, परिवहन कार्यालय, अधिवक्ताओं के कार्यालय, पुलिस स्टेशन, न्यायालय, फायर स्टेशन, तहसील कार्यालय और मंत्रालय से जुड़े भवन शामिल किए जाएंगे।

 

स्कूल और कॉलेजों के लिए कोड (4)

 

जनगणना विभाग ने स्कूल, कॉलेज और प्रशिक्षण संस्थानों के लिए कोड (4) तय किया है। इसमें वे शैक्षणिक संस्थान भी शामिल होंगे जहां छात्रों के रहने की व्यवस्था उपलब्ध है। इससे शिक्षा संस्थानों का अलग और सटीक रिकॉर्ड तैयार किया जा सकेगा।

 

होटल और अस्पतालों के लिए अलग पहचान

 

होटल, लॉज और गेस्ट हाउस को कोड (5) दिया जाएगा। यह उन भवनों पर लागू होगा जहां यात्रियों के अस्थायी ठहरने की सुविधा होती है।

 

वहीं अस्पताल और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े भवनों के लिए कोड (6) निर्धारित किया गया है। इसमें अस्पताल, नर्सिंग होम, क्लीनिक, दंत चिकित्सालय, पैथोलॉजी सेंटर, प्रसूति गृह, टीकाकरण केंद्र और एक्स-रे क्लीनिक शामिल होंगे।

 

फैक्ट्री और वर्कशॉप भी आएंगे रिकॉर्ड में

 

उद्योग और सेवा कार्यों से जुड़े प्रतिष्ठानों को कोड (7) दिया जाएगा। इसमें फैक्ट्री, वर्कशॉप, ऑटोमोबाइल सर्विस सेंटर, फर्नीचर निर्माण इकाई, जूता निर्माण, बेकरी और मरम्मत कार्य से जुड़े संस्थान शामिल होंगे।

 

सरकार का उद्देश्य यह जानना है कि किसी क्षेत्र में कितनी औद्योगिक गतिविधियां चल रही हैं और किस प्रकार के छोटे-बड़े उत्पादन केंद्र मौजूद हैं।

 

खाली मकान और अन्य भवन भी होंगे दर्ज

 

खाली पड़े मकानों को कोड (0) दिया जाएगा। यानी अब ऐसे भवन भी सरकारी रिकॉर्ड में शामिल होंगे जिनमें कोई नहीं रहता।

 

इसके अलावा सामुदायिक भवन, मनोरंजन स्थल और अन्य गैर-आवासीय भवनों को कोड (9) के तहत दर्ज किया जाएगा। इससे गांव और शहर दोनों क्षेत्रों की पूरी संरचना का विस्तृत डाटा सरकार के पास उपलब्ध हो सकेगा।

 

नई कोडिंग व्यवस्था के जरिए प्रशासन को विकास योजनाएं बनाने, सुविधाओं का विस्तार करने और शहरी-ग्रामीण ढांचे को समझने में काफी मदद मिलने की उम्मीद है।

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