टीईटी मामले में सुप्रीम कोर्ट में आज अहम सुनवाई, शिक्षकों की ओर से उतरेंगे बड़े वकील
देशभर के शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को अनिवार्य किए जाने के मामले में आज सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई होने जा रही है। इस मामले में दाखिल पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई के दौरान शिक्षक संगठन पूरी तैयारी के साथ अदालत में अपना पक्ष रखने वाले हैं। यही वजह है कि शिक्षकों की ओर से देश के दो वरिष्ठ और चर्चित अधिवक्ताओं को खड़ा किया गया है, ताकि कोर्ट में मजबूती से दलील रखी जा सके।
मामला उस फैसले से जुड़ा है जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने सितंबर 2025 में कहा था कि शिक्षण सेवा में बने रहने और पदोन्नति पाने के लिए टीईटी अनिवार्य होगा। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि जिन शिक्षकों की सेवा अवधि पांच साल से कम बची है, उन्हें बिना टीईटी के सेवा जारी रखने की अनुमति दी जा सकती है। इस फैसले के बाद से कई राज्यों में शिक्षकों के बीच असंतोष देखा जा रहा है।
शिक्षक संगठनों का कहना है कि वर्ष 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से छूट मिलनी चाहिए, क्योंकि उस समय भर्ती प्रक्रिया अलग नियमों के तहत हुई थी। इसी मांग को लेकर कई राज्यों के शिक्षक संगठन लगातार आंदोलन कर रहे हैं। दिल्ली में भी टीचर फेडरेशन ऑफ इंडिया (टीएफआई) की ओर से बड़ी रैली आयोजित की गई थी, जिसमें हजारों शिक्षकों ने हिस्सा लिया।
इस मुद्दे को लेकर शिक्षक नेताओं ने कई जनप्रतिनिधियों और नेताओं से भी मुलाकात की है। जानकारी के मुताबिक शिक्षक प्रतिनिधिमंडल ने सांसद जगदंबिका पाल, जितिन प्रसाद और पंकज चौधरी समेत कई नेताओं से बातचीत कर अपनी मांग रखी है।
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टीएफआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा ने बताया कि शिक्षकों का पक्ष रखने के लिए सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता पीएस पटवालिया और वी गिरी को नियुक्त किया गया है। पीएस पटवालिया केंद्र सरकार के पूर्व अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल रह चुके हैं और हरियाणा-पंजाब हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश भी रहे हैं। वहीं वी गिरी केरल हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश रह चुके हैं। दोनों वरिष्ठ अधिवक्ता अदालत से शिक्षकों को राहत देने की अपील करेंगे।
बताया जा रहा है कि इस मामले में कई अन्य शिक्षक संगठनों ने भी अपने-अपने अधिवक्ताओं को सुप्रीम कोर्ट में पेश होने के लिए तैयार किया है। ऐसे में आज की सुनवाई को लाखों शिक्षकों के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब सभी की नजर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी हुई है, क्योंकि इसका असर देशभर के शिक्षकों की सेवा और भविष्य दोनों पर पड़ सकता है।
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