TET अनिवार्यता पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, बिना TET नौकरी नहीं! रिव्यू पिटीशन पर आदेश सुरक्षित

TET अनिवार्यता पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, बिना TET नौकरी नहीं! रिव्यू पिटीशन पर आदेश सुरक्षित

देशभर के हजारों कार्यरत शिक्षकों की निगाहें जिस मामले पर टिकी थीं, उस TET अनिवार्यता मामले में आज माननीय सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई। जस्टिस दत्ता की डिवीजन बेंच में दर्जनों रिव्यू पिटीशनों पर विस्तृत बहस हुई, जिसके बाद अदालत ने आदेश सुरक्षित रखने के संकेत दिए हैं। माना जा रहा है कि निर्णय कुछ दिनों बाद जारी किया जा सकता है।

सुनवाई के दौरान कोर्ट की टिप्पणियों से यह स्पष्ट संकेत मिले कि बिना TET के सेवा में बने रहने की संभावना बेहद कम दिखाई दे रही है। बेंच ने साफ कहा कि बच्चों के भविष्य और शिक्षा की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। अदालत ने यह भी दोहराया कि शिक्षकों को पहले ही पर्याप्त समय दिया जा चुका है और वर्तमान व्यवस्था में TET अनिवार्यता लागू रहेगी।

मामले में सबसे अधिक चर्चा Proviso 1 और Proviso 2 को लेकर हुई। बहस के दौरान यह तर्क रखा गया कि इन प्रावधानों का सार्वजनिक नोटिस नहीं हुआ था, लेकिन कोर्ट ने संकेत दिए कि इसके बावजूद TET की अनिवार्यता समाप्त नहीं मानी जा सकती। अदालत की ओर से कहा गया कि “provided” शब्द कार्यरत शिक्षकों को समय देने के उद्देश्य से था, न कि बिना योग्यता नई नियुक्तियों को वैध ठहराने के लिए।

सुनवाई के दौरान Article 21A का भी उल्लेख हुआ। बेंच ने कहा कि शिक्षा अब केवल सरकारी नीति नहीं बल्कि मौलिक अधिकार है, इसलिए योग्य शिक्षक होना आवश्यक है। कोर्ट ने माना कि NCTE ने पहले ही शिक्षकों को TET पास करने के लिए समय दिया था और अब बार-बार राहत देना उचित नहीं होगा।

हालांकि, सुनवाई में यह सवाल भी उठा कि क्या NCTE या केंद्र सरकार भविष्य में TET से किसी प्रकार की छूट दे सकती है। इस पर अदालत ने स्पष्ट निर्णय नहीं दिया, लेकिन वर्तमान स्थिति में किसी बड़ी राहत की संभावना नहीं दिखाई दी। माना जा रहा है कि यदि कोई राहत मिलती भी है तो वह केवल समयावधि बढ़ाने के रूप में हो सकती है।

सुनवाई के दौरान जस्टिस दत्ता ने 01 सितंबर 2027 की समयसीमा का भी उल्लेख किया। इससे यह संकेत मिला कि अदालत कार्यरत शिक्षकों को अंतिम अवसर देने पर विचार कर सकती है, लेकिन TET अनिवार्यता हटाने के पक्ष में फिलहाल कोई सकारात्मक संकेत नहीं मिले।

फिलहाल आदेश सुरक्षित माने जा रहे हैं और अब सभी की नजर सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले पर टिकी हुई है। आने वाले आदेश से लाखों शिक्षकों के भविष्य पर सीधा असर पड़ सकता है।

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