सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पहले बढ़ी शिक्षकों की उम्मीदें RTE संशोधन नियम 2017 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को TET से राहत 

सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पहले बढ़ी शिक्षकों की उम्मीदें RTE संशोधन नियम 2017 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को TET से राहत 

प्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को लेकर चल रहे विवाद के बीच अब लाखों शिक्षकों की नजर सुप्रीम कोर्ट के आने वाले फैसले पर टिकी हुई है। 13 मई को हुई सुनवाई के बाद अभी अंतिम निर्णय आना बाकी है, लेकिन उससे पहले ही शिक्षक संगठनों ने अपनी मांगों को लेकर आवाज तेज कर दी है। खासतौर पर वर्ष 2017 से पहले नियुक्त शिक्षकों को TET की अनिवार्यता से राहत देने की मांग अब बड़े स्तर पर उठाई जा रही है। यह मुद्दा केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि हजारों शिक्षकों के भविष्य, नौकरी और सेवा सुरक्षा से जुड़ा हुआ है।

शिक्षक संगठनों का कहना है कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) के तहत वर्ष 2017 में जो संशोधन किए गए थे, उनमें पहले से कार्यरत शिक्षकों को न्यूनतम योग्यता प्राप्त करने के लिए विशेष अवसर देने का प्रावधान किया गया था। संगठन का दावा है कि 31 मार्च 2015 तक नियुक्त या कार्यरत शिक्षकों को अतिरिक्त समय देकर उनकी सेवाओं को सुरक्षित रखने की मंशा स्पष्ट थी। ऐसे में अब वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों पर अचानक TET की अनिवार्यता लागू करना न्यायसंगत नहीं माना जा सकता।

शासकीय शिक्षक संगठन के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष उपेंद्र कौशल ने कहा कि वर्ष 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों की नियुक्ति उस समय हुई थी, जब RTE अधिनियम लागू ही नहीं हुआ था। इसलिए बाद में लागू किए गए नियमों को पूर्व प्रभाव से लागू करना संवैधानिक भावना और प्राकृतिक न्याय के विरुद्ध माना जाना चाहिए। संगठन का मानना है कि जिन शिक्षकों ने वर्षों तक विद्यालयों में सेवाएं दी हैं, उनकी वरिष्ठता और रोजगार को किसी नई शर्त के आधार पर प्रभावित करना उचित नहीं होगा।

इस पूरे विवाद में वर्ष 2017 का संशोधन विधेयक भी चर्चा का केंद्र बना हुआ है। शिक्षक संगठनों के अनुसार तत्कालीन मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा संसद में प्रस्तुत संशोधन विधेयक का उद्देश्य अप्रशिक्षित शिक्षकों को अतिरिक्त समय देकर आवश्यक प्रशिक्षण पूरा कराना था। इसमें डी.एड और बी.एड जैसी प्रशिक्षण योग्यताओं का उल्लेख तो किया गया, लेकिन TET को लेकर स्पष्ट शब्दावली नहीं दी गई। यही कारण है कि शिक्षक संगठन अब केंद्र सरकार से दोबारा स्थिति स्पष्ट करने या नया संशोधन लाने की मांग कर रहे हैं।

शिक्षकों का कहना है कि अगर पुराने नियुक्त शिक्षकों पर TET की अनिवार्यता सख्ती से लागू की जाती है, तो इससे लाखों परिवार प्रभावित हो सकते हैं। लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों के सामने नौकरी का संकट खड़ा हो सकता है। यही वजह है कि संगठन केंद्र और राज्य सरकार दोनों से हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं, ताकि सेवारत शिक्षकों के अधिकार और भविष्य सुरक्षित रह सकें।

फिलहाल सभी की निगाहें सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले पर टिकी हैं। आने वाला निर्णय न केवल शिक्षकों के भविष्य को प्रभावित करेगा, बल्कि शिक्षा व्यवस्था और नियुक्ति नियमों पर भी बड़ा असर डाल सकता है। ऐसे समय में सरकार और न्यायपालिका दोनों से संतुलित और संवेदनशील निर्णय की उम्मीद की जा रही है, जिससे शिक्षा व्यवस्था भी मजबूत रहे और वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों के हित भी सुरक्षित रह सकें।

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