जनगणना ड्यूटी पर कर्मचारियों का दर्द: “काम जल्दी करो तो शक, देर हो जाए तो कार्रवाई”

जनगणना ड्यूटी पर कर्मचारियों का दर्द: “काम जल्दी करो तो शक, देर हो जाए तो कार्रवाई”

जनगणना कार्य को लेकर कर्मचारियों और शिक्षकों में लगातार असंतोष बढ़ता जा रहा है। भीषण गर्मी में फील्ड पर काम कर रहे कर्मियों का कहना है कि प्रशासन एक ओर तय समय में कार्य पूरा करने का दबाव बना रहा है, वहीं यदि कोई कर्मचारी मेहनत करके जल्दी काम पूरा कर ले तो उस पर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं।

कर्मचारियों का कहना है कि जनगणना का कार्य उनके मूल कार्य से बिल्कुल अलग है और इसे करना जितना आसान दिखता है, वास्तव में उतना है नहीं। फील्ड में किसी प्रकार की उचित गाइडेंस उपलब्ध नहीं है। एक महीने पहले दी गई ट्रेनिंग उस समय समझ में नहीं आई, लेकिन अब जब जमीनी स्तर पर काम शुरू हुआ है तो कई नई समस्याएं सामने आ रही हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि कर्मचारियों की शंकाओं का समाधान कौन करेगा?

जनगणना ड्यूटी में लगे कर्मियों ने बताया कि उन्हें पूरे गांव का नक्शा तैयार करना पड़ रहा है, हर घर की नंबरिंग करनी होती है और प्रत्येक परिवार से 34 सवालों की जानकारी लेकर उसे ऑनलाइन दर्ज करना पड़ता है। साथ ही ऑफलाइन रिकॉर्ड भी सुरक्षित रखना होता है ताकि मोबाइल खराब या गुम होने की स्थिति में डेटा सुरक्षित रहे।

कर्मचारियों का कहना है कि काम करते समय यह भी सुनिश्चित करना होता है कि सर्वे एक निश्चित दिशा से ही किया जाए और कोई भी घर छूटने न पाए। इसके अलावा गूगल मैप पर सही लोकेशन सेट करना भी बड़ी चुनौती बन गया है। कई बार पढ़े-लिखे लोग भी अपने घर की सही लोकेशन नहीं खोज पाते, जबकि कर्मियों को सैकड़ों घरों की लोकेशन सटीक दर्ज करनी पड़ रही है।

ड्यूटी कर रहे कर्मचारियों ने मानदेय को लेकर भी नाराजगी जताई। उनका कहना है कि इतने बड़े और जिम्मेदारी भरे कार्य के बदले मिलने वाली राशि बेहद कम है। कई कर्मचारियों का कार्य क्षेत्र घर से काफी दूर है, जिससे आने-जाने में ही बड़ी रकम खर्च हो रही है।

कर्मचारियों ने प्रशासन से मांग की है कि जनगणना कार्य कर रहे कर्मियों को अनावश्यक रूप से परेशान न किया जाए और फील्ड की वास्तविक परिस्थितियों को समझते हुए सहयोगात्मक रवैया अपनाया जाए।

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