रिव्यू डिसीजन- माननीय सर्वोच्च न्यायालय TET अनिवार्यता पर सुप्रीम कोर्ट का आदेश जारी, देखें

रिव्यू डिसीजन- माननीय सर्वोच्च न्यायालय TET अनिवार्यता पर सुप्रीम कोर्ट का आदेश जारी, देखें

TET अनिवार्यता पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, सभी रिव्यू पिटीशन खारिज

देशभर के लाखों कार्यरत शिक्षकों के लिए टीईटी अनिवार्यता मामले में माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने दायर सभी रिव्यू पिटीशन खारिज कर दी हैं और पहले दिए गए आदेश को बरकरार रखा है। हालांकि, शिक्षकों को राहत देते हुए टीईटी योग्यता प्राप्त करने की समय सीमा 2 वर्ष से बढ़ाकर 3 वर्ष कर दी गई है।

क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने?

माननीय न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि संबंधित प्राधिकरणों द्वारा टीईटी परीक्षा समय पर आयोजित कराना आवश्यक है और परीक्षा प्रक्रिया में समय व संसाधन लगते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए अदालत ने पहले निर्धारित समय सीमा में एक वर्ष की बढ़ोतरी कर दी है।

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अब सेवारत शिक्षकों को टीईटी योग्यता 31 अगस्त 2028 तक प्राप्त करनी होगी। पहले यह अंतिम तिथि 31 अगस्त 2027 निर्धारित की गई थी।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश की मुख्य बातें

रिव्यू पिटीशन दाखिल करने की अनुमति दी गई।

देरी को माफ किया गया।

जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस मनमोहन की बेंच ने रिपोर्टेबल जजमेंट सुनाया।

सभी रिव्यू पिटीशन खारिज कर दी गईं।

लंबित इंटरलोक्यूटरी एप्लीकेशन का भी निस्तारण कर दिया गया।

सेवारत शिक्षकों को टीईटी से कोई छूट नहीं मिली।

केवल टीईटी पास करने की समय सीमा एक वर्ष बढ़ाई गई।

शिक्षकों के लिए क्या मायने हैं?

इस फैसले के बाद यह पूरी तरह साफ हो गया है कि सरकारी स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों के लिए टीईटी योग्यता अनिवार्य रहेगी। अदालत ने किसी भी प्रकार की स्थायी छूट देने से इनकार कर दिया है।

हालांकि, कई राज्यों में लंबे समय से टीईटी परीक्षा नियमित रूप से आयोजित न होने और बड़ी संख्या में शिक्षकों के लंबित रहने को देखते हुए अदालत ने व्यावहारिक राहत दी है। अब शिक्षकों को तैयारी और परीक्षा देने के लिए अतिरिक्त एक वर्ष का समय मिलेगा।

शिक्षा विभाग और राज्यों पर भी बढ़ेगा दबाव

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद अब राज्यों और संबंधित शिक्षा बोर्डों पर समय पर टीईटी परीक्षा कराने का दबाव बढ़ेगा। यदि परीक्षाएं समय पर आयोजित नहीं होती हैं तो लाखों शिक्षकों की सेवा पर असर पड़ सकता है।

आदेश का सबसे अहम संदेश

अदालत ने साफ संकेत दिया है कि गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा के लिए प्रशिक्षित और पात्र शिक्षक जरूरी हैं। इसी कारण टीईटी को अनिवार्य योग्यता माना गया है। अदालत ने यह भी माना कि व्यवस्था संबंधी कठिनाइयों के कारण शिक्षकों को कुछ अतिरिक्त समय दिया जाना चाहिए।

इस फैसले के बाद अब सभी कार्यरत शिक्षकों को 31 अगस्त 2028 तक टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य होगा।

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