प्रभारी प्रधानाध्यापकों को प्रधानाध्यापक के समान वेतन देने के मामले में बड़ी अपडेट
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत प्रभारी प्रधानाध्यापकों को नियमित प्रधानाध्यापक के समान वेतनमान देने की मांग से जुड़े मामले में एक महत्वपूर्ण न्यायिक प्रगति सामने आई है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने इस मामले में राज्य सरकार को अपना जवाब दाखिल करने के लिए तीन सप्ताह का समय प्रदान किया है। इसके बाद याचिकाकर्ता को एक सप्ताह के भीतर प्रत्युत्तर दाखिल करने का अवसर दिया जाएगा।
इस मामले की अगली सुनवाई 20 जुलाई 2026 से शुरू होने वाले सप्ताह में निर्धारित की गई है। ऐसे में प्रदेश भर के हजारों प्रभारी प्रधानाध्यापक अब आगामी सुनवाई पर नजर बनाए हुए हैं।
क्या है पूरा मामला?
वर्तमान में प्रदेश के अनेक प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में प्रभारी प्रधानाध्यापक वर्षों से विद्यालय संचालन की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। उनका कहना है कि वे नियमित प्रधानाध्यापक की तरह सभी प्रशासनिक और शैक्षणिक दायित्वों का निर्वहन करते हैं, लेकिन उन्हें उस पद के अनुरूप वेतन और अन्य वित्तीय लाभ नहीं मिलते।
इसी मुद्दे को लेकर याचिका दायर की गई है, जिसमें मांग की गई है कि प्रभारी प्रधानाध्यापकों को नियमित प्रधानाध्यापक के समान वेतनमान और सुविधाएं प्रदान की जाएं। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि समान कार्य के लिए समान वेतन का सिद्धांत लागू होना चाहिए।
हाईकोर्ट में क्या हुआ?
उपलब्ध न्यायालयीय आदेश के अनुसार, माननीय न्यायमूर्ति राजीव सिंह की अदालत ने राज्य सरकार और अन्य प्रतिवादियों को तीन सप्ताह के भीतर काउंटर एफिडेविट (जवाबी हलफनामा) दाखिल करने का निर्देश दिया है।
आदेश में कहा गया है कि
प्रतिवादी पक्ष को जवाब दाखिल करने के लिए 3 सप्ताह का समय दिया जाता है।
इसके बाद याचिकाकर्ता को 1 सप्ताह में प्रत्युत्तर दाखिल करने की अनुमति होगी।
मामले को 20 जुलाई 2026 से प्रारंभ होने वाले सप्ताह में पुनः सूचीबद्ध किया जाएगा।
शिक्षकों में बढ़ी उम्मीद
इस मामले की सुनवाई को लेकर प्रभारी प्रधानाध्यापकों के बीच नई उम्मीद जगी है। लंबे समय से वेतन विसंगति का मुद्दा उठा रहे शिक्षक संगठनों का मानना है कि यदि अदालत समान कार्य के आधार पर फैसला देती है, तो बड़ी संख्या में प्रभारी प्रधानाध्यापकों को आर्थिक लाभ मिल सकता है।
हालांकि अंतिम निर्णय अभी आना बाकी है और फिलहाल अदालत ने केवल सरकार से जवाब मांगा है। इसलिए किसी भी प्रकार के लाभ या वेतन वृद्धि को लेकर अभी आधिकारिक निर्णय नहीं हुआ है।
20 जुलाई की सुनवाई पर टिकी निगाहें
अब इस पूरे मामले में अगली महत्वपूर्ण तारीख 20 जुलाई 2026 होगी। उस समय सरकार का पक्ष भी अदालत के सामने आएगा और आगे की कानूनी प्रक्रिया तय होगी।
प्रदेश के हजारों प्रभारी प्रधानाध्यापक उम्मीद कर रहे हैं कि आगामी सुनवाई में उनके लंबे समय से लंबित वेतन संबंधी मुद्दे पर सकारात्मक प्रगति देखने को मिलेगी।