भीषण गर्मी में जनगणना ड्यूटी: क्या यह सही समय है?
अप्रैल महीने में ही जब तापमान आसमान छूने लगा है और लू के थपेड़े लोगों को घरों में रहने पर मजबूर कर रहे हैं, ऐसे समय में जनगणना जैसे व्यापक फील्ड वर्क की योजना कई गंभीर सवाल खड़े करती है। सवाल केवल काम का नहीं, बल्कि उससे जुड़े लाखों कर्मचारियों—खासतौर पर बेसिक शिक्षा के शिक्षकों—की सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य-स्थितियों का भी है।
☀️ बढ़ती गर्मी और खतरे का अंदेशा
मौसम विभाग के पूर्वानुमान पहले ही चेतावनी दे चुके हैं कि मई-जून में तापमान और अधिक खतरनाक स्तर तक जा सकता है। ऐसे में जनगणना जैसे कार्य, जिसमें घर-घर जाकर जानकारी जुटानी होती है, कर्मचारियों को सीधे लू और डिहाइड्रेशन जैसे जोखिमों के बीच खड़ा कर देता है।
दोपहर के समय, जब आम लोग और यहां तक कि जानवर भी छांव तलाशते हैं, उस समय प्रगणक (Enumerator) का दरवाजे-दरवाजे जाना न सिर्फ कठिन बल्कि जोखिमभरा भी है।
📋 फील्ड वर्क की वास्तविकता
जनगणना कोई ऐसा काम नहीं है जिसे सुबह-शाम के सीमित समय में निपटा लिया जाए। इसमें हर घर तक पहुंचना, जानकारी एकत्र करना, सत्यापन करना—ये सब लगातार कई घंटों के फील्ड वर्क की मांग करता है।
इस पूरी प्रक्रिया में सबसे अहम भूमिका “प्रगणक” की होती है, और वर्तमान व्यवस्था में यह जिम्मेदारी मुख्य रूप से बेसिक शिक्षा के शिक्षकों पर डाली जाती है।
⚖️ जिम्मेदारी का असंतुलन
यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, लेखपाल, अमीन, ग्राम विकास अधिकारी (VDO) और सचिव जैसे अन्य फील्ड से जुड़े कर्मचारी मौजूद हैं, तो प्रगणक की जिम्मेदारी लगभग पूरी तरह शिक्षकों पर ही क्यों डाली जाती है?
क्या यह कार्यभार का असमान वितरण नहीं है?
🧑🏫 शिक्षक: “सौतेली संतान” जैसा व्यवहार?
जमीनी स्तर पर कई शिक्षकों की यह भावना सामने आती है कि उनसे हर प्रकार का कार्य लिया जाता है—चाहे वह चुनाव हो, सर्वे हो या जनगणना—लेकिन उनकी सुरक्षा और सुविधा को प्राथमिकता नहीं दी जाती।
गर्मी, स्वास्थ्य जोखिम और कार्यभार के बावजूद अपेक्षा यही रहती है कि काम बिना किसी बाधा के पूरा हो।
🚨 स्वास्थ्य और सुरक्षा का मुद्दा
लू लगना, पानी की कमी (डिहाइड्रेशन), चक्कर आना और थकावट—ये सभी खतरे ऐसे मौसम में आम हो जाते हैं। यदि उचित सुरक्षा उपाय (जैसे समय का बदलाव, पानी की व्यवस्था, मेडिकल सपोर्ट) नहीं किए गए, तो यह ड्यूटी कई लोगों के लिए गंभीर स्वास्थ्य समस्या बन सकती है।
📢 क्या हो सकते हैं समाधान?
जनगणना का समय मौसम के अनुकूल तय किया जाए (जैसे सर्दियों में)
फील्ड वर्क का समय सुबह और शाम तक सीमित किया जाए
अन्य फील्ड कर्मचारियों को भी प्रगणक की जिम्मेदारी में शामिल किया जाए
कर्मचारियों के लिए पानी, छाया और मेडिकल सुविधा सुनिश्चित की जाए
कार्य के लिए उचित मानदेय और सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू हों
माना कि जनगणना देश के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण प्रक्रिया है, लेकिन इसे लागू करने का तरीका भी उतना ही संवेदनशील होना चाहिए। यदि इस प्रक्रिया में शामिल कर्मचारियों की सुरक्षा और सम्मान को नजरअंदाज किया गया, तो यह न केवल उनके स्वास्थ्य के लिए खतरा बनेगा, बल्कि व्यवस्था की संवेदनशीलता पर भी सवाल उठाएगा।
👉 जरूरत इस बात की है कि “काम” के साथ-साथ “काम करने वालों” की भी चिंता की जाए।