नौकरी बदलने वालों के लिए खुशखबरी: अब ‘फॉर्म 122’ बचाएगा आपका टैक्स और बढ़ाएगा टेक-होम सैलरी
आज के समय में बेहतर करियर, ज्यादा सैलरी और नई संभावनाओं की तलाश में नौकरी बदलना आम बात हो गई है। कोई बेहतर पैकेज के लिए कंपनी बदलता है तो कोई नई जिम्मेदारियों और ग्रोथ के लिए। लेकिन अक्सर लोग एक जरूरी बात पर ध्यान नहीं देते — नौकरी बदलने का असर सीधे उनकी सैलरी और टैक्स पर पड़ता है।
कई कर्मचारियों ने यह महसूस किया होगा कि नई नौकरी जॉइन करने के बाद शुरुआती महीनों में हाथ में आने वाली सैलरी उम्मीद से कम हो जाती है। इसकी सबसे बड़ी वजह टैक्स कैलकुलेशन में गड़बड़ी होती है। इसी समस्या को कम करने के लिए आयकर विभाग ने एक नया फॉर्म पेश किया है, जिसे ‘फॉर्म 122’ कहा जा रहा है।
यह फॉर्म खासतौर पर उन कर्मचारियों के लिए फायदेमंद माना जा रहा है जिन्होंने एक ही वित्त वर्ष में नौकरी बदली है। अगर सही समय पर यह फॉर्म नए नियोक्ता को दे दिया जाए, तो अतिरिक्त टैक्स कटने से बचा जा सकता है और टेक-होम सैलरी बेहतर हो सकती है।
क्या है फॉर्म 122?
फॉर्म 122 एक तरह का संयुक्त घोषणा पत्र (Joint Declaration Form) है। इसमें कर्मचारी अपनी पुरानी कंपनी से मिली आय, वहां कटे हुए टैक्स, अन्य आय और टैक्स छूट से जुड़ी जानकारी नए नियोक्ता को देता है।
सरल भाषा में समझें तो यह फॉर्म आपकी पुरानी और नई नौकरी के बीच टैक्स संबंधी जानकारी को जोड़ने का काम करता है।
पहले कर्मचारियों को फॉर्म 12B या अन्य दस्तावेजों के जरिए जानकारी देनी पड़ती थी। लेकिन कई बार यह प्रक्रिया अधूरी रह जाती थी। नई कंपनी को पुरानी आय की जानकारी समय पर नहीं मिलती थी और नतीजतन नया नियोक्ता फिर से शुरुआत से टैक्स काटना शुरू कर देता था।
नौकरी बदलने पर क्यों बढ़ जाती है टैक्स की परेशानी?
मान लीजिए आपने अप्रैल से सितंबर तक एक कंपनी में काम किया और अक्टूबर में दूसरी कंपनी जॉइन कर ली। पुरानी कंपनी ने कुछ टैक्स काटा, कुछ निवेश छूट दी और आपकी आय का हिसाब उसी आधार पर बनाया।
अब नई कंपनी को यदि यह जानकारी नहीं मिलेगी, तो वह केवल अक्टूबर के बाद वाली सैलरी देखकर टैक्स कैलकुलेट करेगी। ऐसे में कई बार दो बार स्टैंडर्ड डिडक्शन का लाभ जुड़ जाता है या टैक्स की सही गणना नहीं हो पाती।
इसके कारण दो स्थितियां बन सकती हैं:
या तो जरूरत से ज्यादा टीडीएस कट जाएगा
या बाद में आईटीआर भरते समय भारी टैक्स बकाया निकल सकता है
दोनों ही स्थितियां कर्मचारियों के लिए परेशानी बढ़ाती हैं।
फॉर्म 122 भरने के फायदे
1. सही टैक्स कटौती
फॉर्म 122 के जरिए नया नियोक्ता आपकी कुल आय को ध्यान में रखकर टैक्स काटता है। इससे टैक्स कैलकुलेशन सही रहता है।
2. टेक-होम सैलरी बढ़ सकती है
अगर पहले से टैक्स कट चुका है और उसकी जानकारी नई कंपनी को मिल जाती है, तो अतिरिक्त टीडीएस कटने से बचाव होता है। इससे हर महीने हाथ में आने वाली सैलरी थोड़ी ज्यादा हो सकती है।
3. टैक्स रिफंड की झंझट कम
बहुत से कर्मचारियों का जरूरत से ज्यादा टैक्स कट जाता है और फिर उन्हें रिफंड का इंतजार करना पड़ता है। फॉर्म 122 इस परेशानी को काफी हद तक कम कर सकता है।
4. ब्याज और जुर्माने से बचाव
अगर कुल बकाया टैक्स 10 हजार रुपये से ज्यादा निकलता है, तो आयकर अधिनियम की धारा 234B और 234C के तहत ब्याज देना पड़ सकता है। सही जानकारी देने से इस जोखिम को कम किया जा सकता है।
फॉर्म 122 में कौन-कौन सी जानकारी देनी होती है?
यह फॉर्म भरते समय कर्मचारी को कई महत्वपूर्ण जानकारियां देनी होती हैं। जैसे:
पुरानी कंपनी से मिला कुल वेतन
वहां कटा हुआ टीडीएस
बोनस और विशेष भत्ते
बैंक ब्याज जैसी अन्य आय
मकान किराया या अन्य स्रोत से आय
गृह ऋण ब्याज का विवरण
निवेश और टैक्स बचत से जुड़ी जानकारी
इन जानकारियों के आधार पर नया नियोक्ता आपकी वास्तविक टैक्स देनदारी तय करता है।
किन दस्तावेजों की जरूरत पड़ेगी?
फॉर्म 122 भरने के लिए कुछ जरूरी दस्तावेज अपने पास रखना बेहतर रहेगा:
पुरानी कंपनी का फॉर्म-16
सैलरी स्लिप
फुल एंड फाइनल सेटलमेंट लेटर
टीडीएस विवरण
बैंक ब्याज प्रमाण पत्र
गृह ऋण ब्याज प्रमाण पत्र
पैन कार्ड और आधार जानकारी
अगर फॉर्म-16 अभी नहीं मिला है, तो वेतन पर्ची और फॉर्म 26AS की मदद से भी जानकारी जुटाई जा सकती है।
फॉर्म जमा करने के तरीके
एचआर विभाग को दें
सबसे सामान्य तरीका यही है। फॉर्म भरकर कंपनी के एचआर या पेरोल विभाग को जमा कर दें।
ऑनलाइन पोर्टल के जरिए
कई कंपनियां डिजिटल एचआर सिस्टम इस्तेमाल करती हैं। वहां कर्मचारी सीधे ऑनलाइन जानकारी अपडेट कर सकते हैं।
ईमेल के जरिए
कुछ कंपनियां स्कैन कॉपी ईमेल से भी स्वीकार करती हैं।
अगर फॉर्म जमा करना भूल गए तो क्या करें?
कई बार नौकरी बदलने के दौरान इतनी भागदौड़ रहती है कि जरूरी दस्तावेज जमा करना छूट जाता है। अगर आप भी फॉर्म 122 देना भूल गए हैं, तो घबराने की जरूरत नहीं है।
सबसे पहले अपनी पुरानी कंपनी से फुल एंड फाइनल स्टेटमेंट लें। फिर दोनों कंपनियों की आय जोड़कर देखें कि कुल टैक्स कितना बन रहा है।
यदि लगे कि टैक्स कम कटा है, तो आयकर रिटर्न की आखिरी तारीख का इंतजार न करें। तुरंत ‘सेल्फ-असेसमेंट टैक्स’ जमा कर दें। इससे देरी पर लगने वाले ब्याज से बचा जा सकता है।
क्या यह फॉर्म अनिवार्य है?
फिलहाल फॉर्म 122 को कानूनी रूप से अनिवार्य नहीं बताया गया है। लेकिन टैक्स विशेषज्ञ इसे कर्मचारियों के हित में बेहद जरूरी मान रहे हैं।
खासतौर पर उन लोगों के लिए जो:
साल के बीच में नौकरी बदलते हैं
दो कंपनियों से आय प्राप्त करते हैं
बोनस या इंसेंटिव पाते हैं
होम लोन या टैक्स छूट का लाभ लेते हैं
क्या सरकारी और निजी कर्मचारियों पर भी लागू होगा?
हां, यह सुविधा सभी वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए उपयोगी मानी जा रही है। चाहे कर्मचारी निजी कंपनी में काम करता हो या सरकारी विभाग में, नौकरी बदलने की स्थिति में यह फॉर्म फायदेमंद साबित हो सकता है।
गलत जानकारी देने पर हो सकती है कार्रवाई
ध्यान रखें कि फॉर्म 122 में दी गई जानकारी सही और पूरी होनी चाहिए। यदि कोई कर्मचारी जानबूझकर आय छिपाता है या गलत टैक्स विवरण देता है, तो बाद में आयकर विभाग नोटिस जारी कर सकता है।
ऐसी स्थिति में अतिरिक्त टैक्स, ब्याज और जुर्माना भी देना पड़ सकता है।
स्वगणना करते समय Location Problem? वीडियो देखकर मिनटों में करें समाधान