LPG Price Hike: कॉमर्शियल सिलेंडर ₹3071 के पार, छोटू’ सिलेंडर ₹261 महंगा

LPG Price Hike: कॉमर्शियल सिलेंडर ₹3071 के पार, छोटू’ सिलेंडर ₹261 महंगा

मई की शुरुआत आम लोगों और कारोबारियों दोनों के लिए महंगाई का नया झटका लेकर आई है। तेल कंपनियों ने कॉमर्शियल LPG सिलेंडर के दामों में बड़ी बढ़ोतरी कर दी है। अब दिल्ली में 19 किलो वाला कॉमर्शियल सिलेंडर ₹3071.50 में मिल रहा है। इससे पहले इसकी कीमत ₹2078.50 थी। यानी एक ही बार में करीब ₹994 की बढ़ोतरी हुई है।

इस फैसले का असर सीधे होटल, ढाबा, रेस्टोरेंट और कैटरिंग कारोबार पर पड़ सकता है। कई शहरों में चाय, नाश्ता और खाने की थाली महंगी होने की आशंका बढ़ गई है। शादी-विवाह के सीजन में कैटरिंग खर्च भी लोगों की जेब पर भारी पड़ सकता है।

‘छोटू’ सिलेंडर भी हुआ महंगा, छात्रों और मजदूरों की बढ़ी चिंता

5 किलो वाला फ्री ट्रेड LPG सिलेंडर, जिसे आम भाषा में ‘छोटू सिलेंडर’ कहा जाता है, अब ₹261 महंगा हो गया है। नई कीमत बढ़कर ₹813.50 पहुंच गई है। पहले यह सिलेंडर ₹552.50 में मिल रहा था।

यह सिलेंडर खासतौर पर प्रवासी मजदूरों, छात्रों और छोटे दुकानदारों के बीच काफी लोकप्रिय है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे लेने के लिए एड्रेस प्रूफ की जरूरत नहीं पड़ती। ऐसे में कीमत बढ़ने से उन लोगों पर सीधा असर पड़ेगा जो छोटे बजट में रोजमर्रा का खर्च संभालते हैं।

हालांकि राहत की बात यह है कि 5 किलो वाले घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है। इसकी कीमत अभी भी ₹339 पर स्थिर बनी हुई है।

मई 2026 में लागू हुए नए बदलाव, ऑनलाइन गेमिंग नियम भी असर में

1 मई से सिर्फ गैस सिलेंडर ही नहीं, बल्कि कुछ और बड़े बदलाव भी लागू हुए हैं। इनमें ‘ऑनलाइन गेमिंग रूल्स 2026’ भी शामिल हैं। सरकार का कहना है कि नए नियमों का मकसद ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म्स पर पारदर्शिता बढ़ाना और यूजर्स की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

इधर गैस की बढ़ती कीमतों ने छोटे कारोबारियों की चिंता बढ़ा दी है। कई लोगों का मानना है कि अगर आने वाले महीनों में भी यही स्थिति रही, तो रोजमर्रा की चीजों के दाम और बढ़ सकते हैं।

घरेलू उपभोक्ताओं को फिलहाल राहत

कॉमर्शियल और फ्री ट्रेड LPG सिलेंडर महंगे होने के बावजूद घरेलू गैस उपभोक्ताओं को अभी राहत मिली हुई है। घरेलू सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। लेकिन बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय कीमतों और तेल कंपनियों की लागत बढ़ने का असर आगे भी देखने को मिल सकता है।

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