टीईटी अनिवार्यता मामले में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा अपडेट, पुराने शिक्षकों को राहत, 13 मई को होगी अहम सुनवाई
टीईटी को लेकर चल रहा विवाद एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। इस बार मामला उन शिक्षकों से जुड़ा है जिनकी नियुक्ति आरटीई एक्ट लागू होने से पहले हुई थी। कोर्ट ने अब इस मुद्दे पर ओपन कोर्ट में सुनवाई की अनुमति दे दी है। ऐसे में हजारों शिक्षकों की नजर आने वाली तारीख पर टिक गई है।
13 मई को होगी अहम सुनवाई, सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार की मांग
28 अप्रैल 2026 को जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस मनमोहन की खंडपीठ ने इस मामले से जुड़ी कई रिव्यू याचिकाओं पर सुनवाई की। यह याचिकाएं “राज्य उत्तर प्रदेश बनाम अंजुमन इशात-ए-तालीम ट्रस्ट एवं अन्य” मामले से संबंधित हैं।
कोर्ट में मांग की गई थी कि मामले की सिर्फ फाइलों के आधार पर नहीं, बल्कि खुली अदालत में मौखिक सुनवाई की जाए। सुप्रीम कोर्ट ने इस मांग को मंजूर कर लिया। अब सभी रिव्यू पेटिशनों को 13 मई 2026 को दोपहर 2 बजे सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा।
यह latest update सामने आने के बाद शिक्षकों के बीच चर्चा तेज हो गई है। कई शिक्षक संगठनों ने भी इसे महत्वपूर्ण कदम माना है।
क्या है पूरा विवाद, क्यों बढ़ी शिक्षकों की चिंता
दरअसल, 1 सितंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि आरटीई एक्ट 2009 लागू होने के बाद शिक्षक नियुक्ति और पदोन्नति के लिए टीईटी जरूरी माना जाएगा।
इसके बाद बड़ी संख्या में शिक्षकों और संगठनों ने पुनर्विचार याचिकाएं दायर कीं। उनका कहना है कि जो शिक्षक आरटीई एक्ट लागू होने से पहले नियुक्त हुए थे, उन पर बाद में लागू नियमों को थोपना उचित नहीं होगा।
मामले में करीब चार दर्जन रिव्यू याचिकाएं दाखिल हुई हैं। इनमें देरी माफी, अतिरिक्त दस्तावेज दाखिल करने की अनुमति और ओपन कोर्ट सुनवाई जैसी कई मांगें शामिल हैं। कई व्यक्तिगत शिक्षकों ने भी हस्तक्षेप आवेदन दायर किए हैं।
पुराने शिक्षकों के भविष्य पर पड़ सकता है सीधा असर
यह मामला सिर्फ कानूनी बहस तक सीमित नहीं है। इसका असर हजारों शिक्षकों की नौकरी, पदोन्नति और सेवा शर्तों पर पड़ सकता है।
कई पुराने शिक्षक लंबे समय से इस असमंजस में हैं कि उन्हें टीईटी देना होगा या नहीं। अगर कोर्ट से राहत मिलती है, तो उनके लिए बड़ी परेशानी कम हो सकती है। ठीक वैसे ही जैसे पुराने नियमों के तहत नियुक्त कर्मचारियों को कई बार नई शर्तों से छूट दी जाती रही है।
फिलहाल अब सबकी नजर 13 मई की सुनवाई पर है। माना जा रहा है कि इस मामले में आने वाला फैसला उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों के शिक्षकों के लिए काफी अहम साबित हो सकता है।