8th Pay Commission से पहले बड़ा मंथन! पेंशन, प्रमोशन और छुट्टियों पर हाई-लेवल मीटिंग, 1.19 करोड़ कर्मचारियों की निगाहें 11 मई पर
केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए आने वाला सोमवार बेहद अहम माना जा रहा है। लंबे समय से सैलरी, पेंशन, प्रमोशन और मेडिकल सुविधाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर इंतजार कर रहे लाखों कर्मचारियों को अब बड़ी उम्मीद दिखाई दे रही है। दरअसल, 11 मई 2026 को कैबिनेट सचिव TV सोमनाथन की अध्यक्षता में नेशनल काउंसिल (JCM) की 49वीं हाई-लेवल मीटिंग होने जा रही है। इस बैठक में केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स से जुड़े 24 महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होगी।
दिल्ली के सेवा तीर्थ स्थित कैबिनेट सचिवालय के कॉन्फ्रेंस हॉल में दोपहर 3 बजे से शुरू होने वाली यह बैठक इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि 8th Pay Commission को लेकर चर्चाएं तेज हैं। ऐसे में कर्मचारियों को उम्मीद है कि सरकार कई लंबे समय से लंबित मांगों पर सकारात्मक फैसला ले सकती है। देशभर के करीब 1.19 करोड़ केंद्रीय कर्मचारी और पेंशनर्स इस बैठक पर नजर बनाए हुए हैं।
कर्मचारियों की सबसे बड़ी मांग, मेडिकल खर्च का पूरा भुगतान
इस बैठक का सबसे अहम एजेंडा मेडिकल रीइम्बर्समेंट और CGHS सुविधाओं में सुधार माना जा रहा है। सरकारी कर्मचारियों का कहना है कि इलाज के दौरान अस्पताल अक्सर तय पैकेज से ज्यादा पैसा वसूल लेते हैं। ऐसी स्थिति में कर्मचारियों को अपनी जेब से अतिरिक्त रकम चुकानी पड़ती है, जिससे आर्थिक दबाव बढ़ जाता है।
स्टाफ साइड ने मांग रखी है कि कर्मचारियों को इलाज पर हुए पूरे वास्तविक खर्च की प्रतिपूर्ति दी जाए। इसके अलावा CS(MA) नियमों के तहत कर्मचारियों को माता-पिता या सास-ससुर में से किसी एक को मेडिकल सुविधा के लिए चुनने का विकल्प देने पर भी विचार किया जाएगा।
दांतों के इलाज को लेकर भी लंबे समय से मांग उठ रही है। खासकर रिटायर्ड कर्मचारियों के लिए डेंटल इम्प्लांट और डेंचर का खर्च काफी भारी पड़ता है। ऐसे में इस खर्च की प्रतिपूर्ति को लेकर भी बैठक में चर्चा होगी। अगर सरकार इस दिशा में फैसला लेती है तो लाखों कर्मचारियों और पेंशनर्स को बड़ी राहत मिल सकती है।
पेंशनर्स के लिए अतिरिक्त पेंशन की मांग ने पकड़ी रफ्तार
बैठक में पेंशनर्स से जुड़े कई अहम मुद्दे भी उठाए जाएंगे। सबसे ज्यादा चर्चा अतिरिक्त पेंशन को लेकर हो रही है। फिलहाल 80 वर्ष की उम्र के बाद अतिरिक्त पेंशन का लाभ मिलता है, लेकिन अब मांग की जा रही है कि इसकी शुरुआत 65 वर्ष की आयु से ही हो।
प्रस्ताव के अनुसार 65 साल की उम्र पर 5 प्रतिशत, 70 साल पर 10 प्रतिशत और 75 साल पर 15 प्रतिशत अतिरिक्त पेंशन दी जाए। लगातार बढ़ती महंगाई और स्वास्थ्य खर्च को देखते हुए पेंशनर्स इस मांग को बेहद जरूरी बता रहे हैं।
इसके साथ ही CGHS क्षेत्र से बाहर रहने वाले पेंशनर्स के लिए मिलने वाले Fixed Medical Allowance यानी FMA को 1000 रुपये से बढ़ाकर 3000 रुपये प्रति माह करने की मांग भी एजेंडे में शामिल है। छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में रहने वाले रिटायर्ड कर्मचारियों के लिए यह फैसला काफी राहत देने वाला साबित हो सकता है।
पारिवारिक पेंशन के नियमों में बदलाव की तैयारी
सरकार पारिवारिक पेंशन से जुड़े नियमों में भी बदलाव पर विचार कर सकती है। बैठक में विधवा आश्रित बहू को परिवार की परिभाषा में शामिल करने का मुद्दा रखा जाएगा ताकि उन्हें भी पारिवारिक पेंशन का लाभ मिल सके।
इसके अलावा परिवार पेंशन की राशि को वर्तमान 30 प्रतिशत से बढ़ाकर मृतक कर्मचारी की अंतिम पेंशन के बराबर यानी 100 प्रतिशत करने की मांग की जा रही है। अगर इस दिशा में कोई सकारात्मक फैसला होता है तो हजारों परिवारों को आर्थिक मजबूती मिल सकती है।
विकलांग बच्चों को पारिवारिक पेंशन पाने में मेडिकल बोर्ड सर्टिफिकेट की अनिवार्यता भी कई बार परेशानी का कारण बनती है। इस नियम को आसान बनाने या हटाने पर भी चर्चा होने की संभावना है।
प्रमोशन और MACP को लेकर भी हो सकती है बड़ी घोषणा
कई सरकारी विभागों में कर्मचारियों को समय पर प्रमोशन नहीं मिल पाता। इसका असर उनकी सैलरी और भविष्य की पेंशन पर भी पड़ता है। ऐसे में बैठक में “नोशनल प्रमोशन” का मुद्दा उठाया जाएगा ताकि कर्मचारियों को वित्तीय नुकसान से बचाया जा सके।
फार्मासिस्ट कर्मचारियों के MACP लाभ, प्रमोशन के बाद वेतन निर्धारण और ग्रुप ‘C’ कर्मचारियों की करियर प्रगति को लेकर भी चर्चा होगी। न्यूनतम अर्हक सेवा को कम करने की मांग भी बैठक के एजेंडे में शामिल है। कर्मचारियों का मानना है कि इससे प्रमोशन की प्रक्रिया तेज होगी और करियर ग्रोथ बेहतर बनेगी।
8th Pay Commission से पहले बढ़ी उम्मीदें
हालांकि इस बैठक का सीधा संबंध 8th Pay Commission से नहीं है, लेकिन माना जा रहा है कि यहां होने वाली चर्चाएं आगे की वेतन और पेंशन नीति पर असर डाल सकती हैं। कर्मचारियों के संगठन लगातार यह मांग कर रहे हैं कि सरकार जल्द नए वेतन आयोग को लेकर स्थिति स्पष्ट करे।
पिछले कुछ वर्षों में महंगाई तेजी से बढ़ी है। ऐसे में सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स को उम्मीद है कि सरकार उनकी आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए बड़े फैसले ले सकती है।