शिक्षकों के समायोजन को लेकर जूनियर-सीनियर विवाद शुरू, मामला फिर पहुंच सकता है हाईकोर्ट
परिषदीय स्कूलों में शिक्षकों के समायोजन को लेकर अब नया विवाद सामने आने लगा है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद प्रदेश के कई जिलों में शिक्षकों को दूसरे स्कूलों में भेजने की प्रक्रिया शुरू हुई, लेकिन अब जूनियर और सीनियर शिक्षकों के बीच असमंजस की स्थिति बन गई है। कहीं जूनियर शिक्षकों का समायोजन किया जा रहा है तो कहीं वरिष्ठ शिक्षकों को सरप्लस मानकर दूसरे विद्यालय भेजा जा रहा है। इसी को लेकर शिक्षकों में नाराजगी बढ़ती दिखाई दे रही है
हाईकोर्ट के आदेश के बाद बढ़ी हलचल
बताया जा रहा है कि हाईकोर्ट ने परिषदीय विद्यालयों में कम से कम दो शिक्षकों की तैनाती सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद शासन स्तर से सभी जिलों के बेसिक शिक्षा अधिकारियों को समायोजन प्रक्रिया पूरी करने को कहा गया। आदेश के अनुसार जिन स्कूलों में शिक्षक अधिक हैं वहां से शिक्षकों को उन विद्यालयों में भेजा जा रहा है जहां शिक्षकों की कमी है।
हालांकि शासन के आदेश में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि समायोजन के दौरान जूनियर शिक्षक को हटाया जाएगा या सीनियर शिक्षक को। यही कारण है कि अलग-अलग जिलों में अलग-अलग तरीके अपनाए जा रहे हैं। अब इसी बात को लेकर विवाद शुरू हो गया है।
अलग-अलग जिलों में अलग व्यवस्था
प्रदेश के कई जिलों में समायोजन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। अमेठी, बाराबंकी और भदोही जैसे जिलों में जूनियर शिक्षकों का समायोजन किया गया है। वहीं मेरठ, बुलंदशहर, प्रतापगढ़ और कौशांबी में वरिष्ठ शिक्षकों को दूसरे स्कूलों में भेजने की तैयारी की गई है।
बरेली में वरिष्ठ शिक्षकों को सरप्लस माना गया है। लखीमपुर खीरी में भी वरिष्ठ शिक्षक को सरप्लस मानने का फैसला लिया गया, लेकिन वहां महिला शिक्षक होने की स्थिति में अधिक समय से कार्यरत पुरुष शिक्षक को समायोजित करने की बात कही गई है।
हरदोई जिले में प्रशासन ने जूनियर और सीनियर दोनों शिक्षकों का डेटा मंगाया है ताकि आगे की प्रक्रिया तय की जा सके। वहीं राजधानी लखनऊ में अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि समायोजन में कनिष्ठ शिक्षक जाएंगे या वरिष्ठ।
फिर बढ़ सकता है कानूनी विवाद
शिक्षकों का कहना है कि यदि स्पष्ट नियम नहीं बनाए गए तो आने वाले दिनों में विवाद और बढ़ सकता है। वरिष्ठ शिक्षक चाहते हैं कि पहले जूनियर शिक्षकों का समायोजन किया जाए, जबकि जूनियर शिक्षक पहले से कार्यरत वरिष्ठ शिक्षकों को हटाने का विरोध कर रहे हैं।
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अब माना जा रहा है कि जिस शिक्षक का मनचाहे विद्यालय में समायोजन नहीं होगा, वह न्यायालय का रुख कर सकता है। ऐसे में यह मामला फिर से हाईकोर्ट तक पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।
जानकारी के अनुसार इस मामले में अगली सुनवाई 22 मई को प्रस्तावित है। शासन ने सभी जिलों से 20 मई तक समायोजन रिपोर्ट मांगी है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और बड़ा रूप ले सकता है, क्योंकि हजारों शिक्षक इस फैसले से सीधे प्रभावित हो रहे हैं।
बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से सरप्लस शिक्षकों को लेकर नया आदेश जारी