शिक्षकों की ‘मौज’ खत्म! छात्र कम-शिक्षक ज्यादा वाले स्कूलों की सूची जारी, अब होगा समायोजन और तबादला

शिक्षकों की ‘मौज’ खत्म! छात्र कम-शिक्षक ज्यादा वाले स्कूलों की सूची जारी, अब होगा समायोजन और तबादला

उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में परिषदीय स्कूलों में छात्र-शिक्षक अनुपात को लेकर बड़ा कदम उठाया गया है। कई सरकारी स्कूल ऐसे पाए गए हैं जहां बच्चों की संख्या बेहद कम है, लेकिन शिक्षकों की तैनाती जरूरत से कहीं ज्यादा है। अब बेसिक शिक्षा विभाग ने ऐसे स्कूलों की “सरप्लस लिस्ट” जारी कर दी है और अतिरिक्त शिक्षकों के समायोजन (Adjustment) की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इससे लंबे समय से एक ही स्कूल में कार्यरत कई शिक्षकों की “मौज” अब खत्म होती नजर आ रही है।

 

कई स्कूलों में बच्चों से ज्यादा शिक्षक!

 

बीएसए कार्यालय द्वारा जारी सूची में कई चौंकाने वाले उदाहरण सामने आए हैं—

 

कल्याणपुर ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय रामपुर भीमसेन में सिर्फ 59 बच्चे नामांकित हैं, जबकि वहां 5 शिक्षक तैनात हैं। इनमें 3 शिक्षक सरप्लस घोषित किए गए हैं।

 

इसी क्षेत्र के एक अन्य प्राथमिक विद्यालय में 47 बच्चों पर 5 शिक्षक मौजूद हैं।

 

चौबेपुर ब्लॉक के प्राइमरी विद्यालय पारा प्रतापपुर द्वितीय में 45 बच्चों के लिए 5 शिक्षक तैनात हैं, जिनमें 3 अतिरिक्त हैं।

 

घाटमपुर ब्लॉक के कंपोजिट विद्यालय भदरस में 214 बच्चों पर 10 शिक्षक कार्यरत हैं, जहां 4 शिक्षक सरप्लस पाए गए।

 

बिधनू ब्लॉक के कंपोजिट विद्यालय ओरछी में सिर्फ 27 बच्चों को पढ़ाने के लिए 5 शिक्षक नियुक्त हैं।

 

 

ये सिर्फ कुछ उदाहरण हैं। जिले के कई स्कूलों में यही स्थिति देखने को मिली है।

 

अब शुरू होगा शिक्षकों का समायोजन

 

बीएसए कार्यालय ने सरप्लस विद्यालयों की सूची सार्वजनिक कर आपत्तियां मांगी हैं। मंगलवार तक आपत्तियां स्वीकार की जाएंगी। इसके बाद जनपद स्तरीय समिति सभी दावों और आपत्तियों का निस्तारण करेगी और फिर अंतिम समायोजन सूची जारी होगी।

 

इस प्रक्रिया के तहत अतिरिक्त शिक्षकों को उन विद्यालयों में भेजा जाएगा जहां शिक्षकों की कमी है।

 

क्या कहते हैं नियम?

 

आरटीई (RTE) नियमों के अनुसार—

 

प्राथमिक विद्यालय में प्रत्येक 30 छात्रों पर 1 शिक्षक होना चाहिए।

 

उच्च प्राथमिक विद्यालय में प्रत्येक 35 छात्रों पर 1 शिक्षक अनिवार्य है।

 

 

लेकिन कानपुर जिले के कई स्कूलों में इन मानकों का पालन नहीं हो रहा था। कहीं छात्र बहुत कम हैं तो कहीं शिक्षक जरूरत से ज्यादा।

 

शिक्षक संगठनों ने उठाए सवाल

 

जूनियर हाईस्कूल महासभा ने इस समायोजन प्रक्रिया में कई विसंगतियां होने का आरोप लगाया है। संगठन के प्रांतीय संयोजक अनुग्रह त्रिपाठी ने कहा कि उच्च प्राथमिक विद्यालयों में गणित और विज्ञान शिक्षकों की नियुक्ति अलग-अलग पदों पर हुई थी, लेकिन समायोजन के दौरान दोनों को एक ही श्रेणी में गिना जा रहा है।

 

उनका कहना है कि इससे विषय विशेषज्ञ शिक्षकों की कमी हो सकती है और छात्रों की पढ़ाई प्रभावित होगी।

 

शिक्षकों की प्रमुख मांगें

 

शिक्षक संगठनों ने सरकार और विभाग से मांग की है कि—

 

गणित और विज्ञान शिक्षकों की गणना अलग-अलग पदों के रूप में की जाए।

 

प्रत्येक उच्च प्राथमिक विद्यालय में कम से कम दो गणित-विज्ञान शिक्षक उपलब्ध हों।

 

समायोजन प्रक्रिया पूरी तरह आरटीई एक्ट के नियमों के अनुसार हो।

 

 

क्या होगा असर?

 

यदि यह समायोजन प्रक्रिया पूरी तरह लागू होती है तो जिले में लंबे समय से एक ही स्कूल में कार्यरत कई शिक्षकों का तबादला संभव है। वहीं जिन स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी है वहां छात्रों को बेहतर पढ़ाई का लाभ मिल सकता है।

 

सरकार का उद्देश्य छात्र-शिक्षक अनुपात को संतुलित करना है, लेकिन शिक्षक संगठनों की आपत्तियों के चलते यह मुद्दा आने वाले दिनों में और गरमा सकता है।

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