DM का ‘मास्टर स्ट्रोक’: जनगणना से ड्यूटी कटाने शिक्षक ने बताया अनफिट, साहब ने ऐसी जगह तैनात किया तुरंत हो गए ‘फिट’
कानपुर। कानपुर में डिजिटल जनगणना 2027 की तैयारियों के बीच एक दिलचस्प मामला सामने आया है। वहीं इस मामले में डीएम DM का फैसला चर्चा का विषय बना हुआ है। जनगणना ड्यूटी Duty से बचने के लिए शिक्षक जिलाधिकारी DM कार्यालय पहुंचे।उन्होंने बीमारी और शारीरिक रूप से ‘अनफिट’ होने का हवाला देकर अपनी ड्यूटी कटवाने की अर्जी दी। डीएम Duty ने दलील सुनने के बाद जो ड्यूटी सौंपी तो शिक्षक teacher खुद को फिट बता जनगणना करने की गुहार लगाने लगे।
कलेक्ट्रेट में बुधवार Wednesday को जनगणना ड्यूटी Duty कटवाने पहुंचे एक सहायक अध्यापक AT की सोच कुछ ही देर में बदल गई। मामला तब रोचक मोड़ पर पहुंच गया, जब जिलाधिकारी DM ने उन्हें न सिर्फ समझाया, बल्कि अपने पास बैठाकर जनता की असली परीक्षा Exam से भी रूबरू करा दिया।
जनता दर्शन के दौरान सहायक अध्यापक AT जयप्रकाश शर्मा अपनी ड्यूटी कटवाने की गुहार लेकर पहुंचे थे। सहायक अध्यापक AT ने दिव्यांग प्रमाण पत्र latter दिखाते हुए खुद को फील्ड में कार्य के लिए असमर्थ बताते हुए राहत की मांग की। इस पर जिलाधिकारी DM जितेन्द्र प्रताप सिंह ने गंभीर लेकिन अलग अंदाज में जवाब देते हुए कहा कि अगर फील्ड में नहीं जा सकते, तो यहीं बैठकर जनता की समस्याएं सुनिए और उनके समाधान में मदद कीजिए।
डीएम DM ने तुरंत उन्हें अपने बगल में बैठा लिया और आने वाली फरियादों को सुनने की जिम्मेदारी दे दी। कुछ ही देर में हालात बदल गए। अलग-अलग तरह की समस्याएं-कहीं जमीन विवाद, कहीं पेंशन अटकी, तो कहीं शिकायतों का अंबार-एक साथ सामने आने लगीं। हर व्यक्ति अपनी समस्या को सबसे जरूरी बताने पर आमादा था।
करीब आधे घंटे तक यह जनशिकायतों को सुनने के बाद सहायक अध्यापक AT के चेहरे के भाव बदल गए। अचानक उन्होंने कुर्सी से खड़े होकर जिलाधिकारी DM से हाथ जोड़कर कहा कि अब वह ड्यूटी नहीं कटवाना चाहते, उन्होंने खुद स्वीकार किया कि एक ही समय में इतनी विविध समस्याओं को सुनना और उनका समाधान करना बेहद कठिन काम है। इसके बाद उन्होंने डीएम DM से कहा कि अब उन्हें जनगणना का फील्ड कार्य करने में कोई आपत्ति नहीं है।
इस पूरे घटनाक्रम के दौरान दिलचस्प यह रहा कि ड्यूटी Duty कटवाने आए कई अन्य कार्मिक चुपचाप खिसकते नजर आए। डीएम DM का यह अनोखा तरीका न सिर्फ एक शिक्षक teacher के नजरिए को बदल गया, बल्कि कलेक्ट्रेट में मौजूद अन्य लोगों के लिए भी एक संदेश बन गया।