शिक्षामित्रों की सेवा अवधि 62 वर्ष किये जाने के सम्बन्ध में शासन स्तर आदेश हुआ जारी

शिक्षामित्रों की सेवा अवधि 62 वर्ष किये जाने के सम्बन्ध में शासन स्तर आदेश हुआ जारी

उत्तर प्रदेश के लाखों शिक्षामित्रों के लिए एक बड़ी खबर सामने आ रही है। लंबे समय से अपनी सेवा अवधि बढ़ाने की मांग कर रहे शिक्षामित्रों को अब राहत मिलने की उम्मीद दिखाई देने लगी है। राज्य में करीब 1.43 लाख शिक्षामित्र कार्यरत हैं और अब उनकी रिटायरमेंट उम्र 60 से बढ़ाकर 62 वर्ष किए जाने को लेकर शासन स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। बताया जा रहा है कि इस संबंध में सरकार ने प्रदेश के सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों यानी BSA से सुझाव मांगे हैं। इसके बाद शिक्षामित्रों के बीच उम्मीद की नई किरण जगी है।

पूरा आदेश देखे डाउनलोड करें 👇 👇 👇 

https://drive.google.com/file/d/1kOl04-CFx_OmkUgq4-K_CxIc18EUPAFq/view?usp=drivesdk

दरअसल, पिछले कुछ समय से कई शिक्षामित्र संगठन लगातार सरकार से मांग कर रहे थे कि उनकी सेवा अवधि बढ़ाई जाए। उनका कहना है कि वर्षों से प्राथमिक विद्यालयों में सेवाएं देने के बावजूद उन्हें अभी भी कई सुविधाओं से वंचित रहना पड़ रहा है। इसी बीच करीब 26 शिक्षामित्रों द्वारा सरकार को पत्र भेजकर रिटायरमेंट उम्र 62 वर्ष किए जाने की मांग उठाई गई थी। इसके बाद शिक्षा विभाग और शासन स्तर पर इस विषय को गंभीरता से लिया जाने लगा। अब सभी जिलों से राय मांगे जाने के बाद यह मुद्दा फिर से चर्चा में आ गया है।

शिक्षामित्रों का कहना है कि वर्तमान समय में महंगाई तेजी से बढ़ रही है और ऐसे में कम समय की सेवा अवधि उनके भविष्य को प्रभावित करती है। कई शिक्षामित्र ऐसे हैं जिन्होंने अपनी पूरी जिंदगी शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में लगा दी। ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में बच्चों को पढ़ाने से लेकर सरकारी योजनाओं को लागू करने तक, उन्होंने हर जिम्मेदारी निभाई है। ऐसे में यदि उनकी सेवा अवधि दो वर्ष और बढ़ाई जाती है, तो इससे उन्हें आर्थिक और सामाजिक दोनों स्तर पर राहत मिल सकती है।

 

प्रदेश के शिक्षा विभाग से जुड़े सूत्रों की मानें तो सरकार इस मामले में सभी पहलुओं पर विचार कर रही है। जिलों से मिलने वाले सुझावों और रिपोर्ट के आधार पर आगे निर्णय लिया जा सकता है। हालांकि अभी तक इस संबंध में कोई अंतिम आदेश जारी नहीं हुआ है, लेकिन शासन स्तर पर चल रही प्रक्रिया ने शिक्षामित्रों की उम्मीदों को जरूर बढ़ा दिया है। कई शिक्षामित्र संगठन इसे सकारात्मक संकेत मान रहे हैं और सरकार से जल्द फैसला लेने की मांग कर रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सेवा अवधि बढ़ाने का फैसला लिया जाता है, तो इसका सीधा फायदा हजारों शिक्षामित्र परिवारों को मिलेगा। इससे उन्हें अतिरिक्त रोजगार सुरक्षा मिलेगी और सेवानिवृत्ति के बाद आर्थिक दबाव भी कुछ हद तक कम हो सकेगा। दूसरी ओर सरकार के सामने वित्तीय और प्रशासनिक पहलुओं को भी ध्यान में रखना बड़ी चुनौती होगी। इसलिए आने वाले समय में इस विषय पर बड़ा फैसला देखने को मिल सकता है।

इस पूरे मामले पर प्रदेशभर के शिक्षामित्रों की नजर टिकी हुई है। सोशल मीडिया से लेकर शिक्षक संगठनों तक हर जगह इस मुद्दे पर चर्चा हो रही है। कई शिक्षामित्रों का कहना है कि उन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी लगातार स्कूलों में सेवाएं दी हैं और अब उन्हें सरकार से सकारात्मक निर्णय की उम्मीद है। आने वाले दिनों में शासन की ओर से यदि कोई बड़ा फैसला लिया जाता है, तो यह लाखों शिक्षामित्रों के लिए राहत भरी खबर साबित हो सकती है।

फिलहाल सभी की निगाहें सरकार और शिक्षा विभाग की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। यदि सेवा अवधि 62 वर्ष करने का प्रस्ताव मंजूर होता है, तो यह शिक्षामित्रों के लिए एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक कदम माना जाएगा।

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