परिषदीय विद्यालयों की नौ शिक्षिकाओं को किया बर्खास्त, लंबे समय से बिना सूचना थीं गैरहाजिर
प्रयागराज में शिक्षा विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए परिषदीय विद्यालयों में तैनात नौ शिक्षिकाओं की सेवाएं समाप्त कर दी हैं। ये सभी शिक्षिकाएं लंबे समय से बिना किसी पूर्व सूचना के विद्यालयों से गैरहाजिर चल रही थीं। लगातार अनुपस्थित रहने और विभागीय नोटिस का संतोषजनक जवाब न देने के बाद बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) अनिल कुमार ने बर्खास्तगी का आदेश जारी किया। इस कार्रवाई के बाद शिक्षा विभाग में हलचल तेज हो गई है और अनुपस्थित चल रहे कर्मचारियों को भी स्पष्ट संदेश मिला है कि कार्य में लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
बीएसए कार्यालय से जारी आदेश के अनुसार जिन शिक्षिकाओं की सेवाएं समाप्त की गई हैं उनमें सहायक अध्यापिका वंदना वर्मा, जया भार्गव, किरण त्रिपाठी, हेना परवीन, रीता देवी, ज्योति यादव, आकांक्षा रस्तोगी, अंकिता साहू और असमत जहां शामिल हैं। विभाग के अनुसार इन सभी शिक्षिकाओं को पहले नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया था, लेकिन उचित जवाब न मिलने के कारण अंततः कार्रवाई की गई।
जानकारी के मुताबिक प्राथमिक विद्यालय बंधवापार करछना में तैनात वंदना वर्मा एक जनवरी 2024 से विद्यालय से गैरहाजिर थीं। वहीं कंपोजिट विद्यालय जुगनीडीह बहरिया की जया भार्गव 15 फरवरी 2024 से अनुपस्थित चल रही थीं। प्राथमिक विद्यालय मिश्री धनूपुर की किरण त्रिपाठी 21 नवंबर 2022 से विद्यालय नहीं पहुंचीं, जबकि प्राथमिक विद्यालय पीथीपुर कौड़िहार प्रथम की हेना परवीन एक अक्टूबर 2021 से गैरहाजिर थीं। इसी तरह प्राथमिक विद्यालय बरेठी सैदाबाद की रीता देवी एक जुलाई 2020 से लगातार अनुपस्थित पाई गईं।
इसके अलावा प्रावि सरपतीपुर बहादुरपुर की ज्योति यादव 20 मई 2025 से, कोडापुर प्रथम फूलपुर की आकांक्षा रस्तोगी 22 जुलाई 2025 से और प्रावि खीरी रामगढ़ कोरांव की अंकिता साहू 31 अगस्त 2025 से विद्यालय नहीं पहुंच रही थीं। प्राथमिक विद्यालय लखनपुर भगवतपुर की असमत जहां भी सात जनवरी 2020 से बिना सूचना के गैरहाजिर चल रही थीं। विभागीय जांच में इन सभी मामलों में लगातार अनुपस्थिति की पुष्टि हुई, जिसके बाद सेवाएं समाप्त करने का निर्णय लिया गया।
शिक्षा विभाग की इस कार्रवाई को अनुशासन व्यवस्था मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि सरकारी विद्यालयों में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए शिक्षकों की नियमित उपस्थिति बेहद जरूरी है। लंबे समय तक बिना सूचना अनुपस्थित रहने से स्कूलों की शिक्षण व्यवस्था पर सीधा असर पड़ता है और छात्रों की पढ़ाई बाधित होती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की कार्रवाई से शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही बढ़ेगी। वहीं कई शिक्षक संगठनों का कहना है कि विभाग को मानवीय पक्ष पर भी ध्यान देना चाहिए, लेकिन बिना सूचना वर्षों तक अनुपस्थित रहना किसी भी स्थिति में उचित नहीं माना जा सकता। फिलहाल प्रयागराज में हुई यह कार्रवाई पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बनी हुई है।
सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और अनुशासन बनाए रखने के लिए विभाग लगातार सख्त कदम उठा रहा है। ऐसे में यह कार्रवाई उन सभी कर्मचारियों के लिए चेतावनी मानी जा रही है जो बिना सूचना लंबे समय तक ड्यूटी से दूर रहते हैं।
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