Promotion:- यूपी में 34 साल बाद 490 शिक्षाधिकारियों का सपना हुआ पूरा, बीएसए पद पर मिली बड़ी पदोन्नति
उत्तर प्रदेश के शिक्षा विभाग से जुड़ी एक बड़ी और लंबे समय से प्रतीक्षित खबर सामने आई है। करीब 34 साल बाद प्रदेश के सैकड़ों शिक्षा अधिकारियों को वह सम्मान और जिम्मेदारी मिली है, जिसका वे वर्षों से इंतजार कर रहे थे। राज्य सरकार ने 490 शिक्षाधिकारियों को बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) और समकक्ष पदों पर पदोन्नति देने का फैसला किया है। इस निर्णय से शिक्षा विभाग में खुशी का माहौल है, क्योंकि लंबे समय से अटकी प्रमोशन प्रक्रिया आखिरकार पूरी हो गई है।
यह फैसला सिर्फ एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि उन अधिकारियों की वर्षों की मेहनत, धैर्य और संघर्ष का परिणाम भी माना जा रहा है। कई अधिकारी ऐसे हैं जिन्होंने अपने पूरे करियर में प्रमोशन की उम्मीद बनाए रखी थी। अब जब आदेश जारी हो चुके हैं, तो शिक्षा विभाग के भीतर इसे ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।
34 साल बाद बदला प्रमोशन का समीकरण
जानकारी के अनुसार, उत्तर प्रदेश शैक्षिक अध्यापन अधीनस्थ (राजपत्रित) सेवा के शिक्षण संवर्ग और निरीक्षण शाखा में कार्यरत अधिकारियों को यह पदोन्नति दी गई है। उप शिक्षा निदेशक अजय कुमार सिंह की ओर से प्रमोशन आदेश जारी किए गए हैं। इसमें महिला शाखा की 159, पुरुष शाखा की 167 और निरीक्षण शाखा के 164 खंड शिक्षा अधिकारियों (BEO) को बीएसए और समकक्ष पदों पर पदोन्नति प्रदान की गई है।
दरअसल, वर्ष 1992 में प्रमोशन के लिए जो कोटा तय किया गया था, उसमें बाद में कई बदलाव हुए। लंबे समय तक पदोन्नति प्रक्रिया स्पष्ट रूप से लागू नहीं हो सकी। अब नए नियमों के तहत महिला और पुरुष शिक्षण संवर्ग को 33-33 प्रतिशत तथा निरीक्षण शाखा को 34 प्रतिशत कोटा निर्धारित किया गया है। इस नए फार्मूले के आधार पर प्रमोशन प्रक्रिया को पूरा किया गया।
शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह फैसला विभागीय संतुलन और पारदर्शिता को मजबूत करेगा। साथ ही इससे उन अधिकारियों का मनोबल भी बढ़ेगा जो लंबे समय से पदोन्नति की प्रतीक्षा कर रहे थे।
वर्षों से रुकी थी बीईओ अधिकारियों की पदोन्नति
खंड शिक्षा अधिकारियों की आखिरी बड़ी पदोन्नति वर्ष 2011 में हुई थी। यानी करीब 15 साल बाद अब दोबारा बड़े स्तर पर प्रमोशन दिया गया है। इससे पहले कई अधिकारी रिटायरमेंट के करीब पहुंच गए थे, लेकिन उन्हें प्रमोशन का लाभ नहीं मिल पाया था। ऐसे में इस फैसले को राहत देने वाला कदम माना जा रहा है।
बीईओ संगठन के अध्यक्ष प्रमेन्द्र शुक्ला ने भी सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है। हालांकि उन्होंने यह मांग भी उठाई है कि जिन अधिकारियों ने वरिष्ठता सूची में सभी मानक पूरे किए हैं लेकिन उन्हें अभी प्रमोशन नहीं मिला है, उन्हें भी जल्द मौका दिया जाए। विभागीय कर्मचारियों का मानना है कि यदि यह प्रक्रिया नियमित रूप से चलती रहे तो भविष्य में ऐसी लंबी प्रतीक्षा की स्थिति नहीं बनेगी।
शिक्षकों के अंतरजनपदीय स्थानांतरण पर लगी रोक
एक तरफ जहां शिक्षा अधिकारियों को प्रमोशन की खुशखबरी मिली है, वहीं दूसरी ओर परिषदीय स्कूलों के शिक्षकों को निराशा हाथ लगी है। बेसिक शिक्षा विभाग ने साफ कर दिया है कि फिलहाल अंतरजनपदीय स्थानांतरण संभव नहीं हो पाएगा। इसकी सबसे बड़ी वजह जनगणना कार्य को बताया जा रहा है।
ग्रीष्मावकाश के दौरान बड़ी संख्या में शिक्षक जनगणना कार्य में लगाए गए हैं। ऐसे में विभाग का कहना है कि शिक्षकों का स्थानांतरण इस समय प्रशासनिक रूप से संभव नहीं है। जानकारी के मुताबिक जनगणना का पहला चरण 20 जून तक चलेगा, जबकि दूसरा चरण अगले वर्ष फरवरी में शुरू होगा। पूरा कार्य मार्च तक जारी रहने की संभावना है।
यही कारण है कि इस वर्ष स्थानांतरण सत्र लगभग शून्य माना जा रहा है। इससे उन शिक्षकों की उम्मीदों को झटका लगा है जो वर्षों से अपने गृह जनपद में तैनाती का इंतजार कर रहे थे। कई शिक्षक संगठन लगातार मांग कर रहे हैं कि स्थानांतरण नीति के तहत उन्हें भी राहत दी जाए।
शिक्षा विभाग में बदलाव का बड़ा संकेत
विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा विभाग में यह कदम भविष्य के बड़े प्रशासनिक बदलावों का संकेत हो सकता है। लंबे समय से लंबित प्रमोशन प्रक्रिया पूरी होने से विभागीय व्यवस्था मजबूत होगी और अधिकारियों में नई ऊर्जा आएगी। साथ ही इससे कार्यप्रणाली में जवाबदेही और बेहतर समन्वय देखने को मिल सकता है।
दूसरी ओर शिक्षकों के स्थानांतरण को लेकर सरकार के सामने बड़ी चुनौती बनी हुई है। क्योंकि बड़ी संख्या में शिक्षक अपने परिवार और व्यक्तिगत कारणों से गृह जनपद में पोस्टिंग चाहते हैं। यदि आने वाले समय में सरकार इस दिशा में कोई समाधान निकालती है तो इससे हजारों शिक्षकों को राहत मिल सकती है।