यूपी में आज से गिने जाएंगे मकान, इंसानों की गिनती फरवरी में शुरू होगी

यूपी में आज से गिने जाएंगे मकान, इंसानों की गिनती फरवरी में शुरू होगी

उत्तर प्रदेश में जनगणना की प्रक्रिया आज से नए चरण में प्रवेश कर चुकी है। शुक्रवार से राज्यभर में मकानों की गिनती और हाउस सर्वे का काम शुरू हो गया है। अब प्रगणक घर-घर जाकर लोगों से जरूरी जानकारी जुटाएंगे। खास बात यह है कि इस बार पूरी जनगणना प्रक्रिया डिजिटल माध्यम से की जा रही है, जिससे काम पहले के मुकाबले ज्यादा तेज और पारदर्शी माना जा रहा है। वहीं, इंसानों की वास्तविक गिनती यानी जनसंख्या गणना अगले साल फरवरी महीने में शुरू होगी। ऐसे में आने वाले कुछ महीने उत्तर प्रदेश के लिए काफी महत्वपूर्ण रहने वाले हैं।

 

इस बार की जनगणना कई मायनों में खास है। पहली बार प्रगणक मोबाइल एप्लीकेशन की मदद से डेटा दर्ज करेंगे। घर-घर जाकर परिवार, मकान और संपत्ति से जुड़े कुल 33 सवाल पूछे जाएंगे। सरकार का कहना है कि डिजिटल प्रक्रिया अपनाने से आंकड़ों में गड़बड़ी की संभावना कम होगी और जानकारी जल्दी तैयार हो सकेगी। यही वजह है कि पूरे प्रदेश में इस अभियान को लेकर बड़े स्तर पर तैयारियां की गई हैं। जनगणना के लिए करीब 5.25 लाख अफसरों और कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है, ताकि तय समय सीमा के भीतर काम पूरा किया जा सके।

 

बीते दिनों सात मई से 21 मई तक स्वगणना अभियान भी चलाया गया था। इस दौरान लोगों को खुद अपनी जानकारी ऑनलाइन दर्ज करने का मौका दिया गया। आंकड़ों के मुताबिक 46 लाख 93 हजार 783 लोगों ने स्वगणना में हिस्सा लिया। इसमें राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जैसे बड़े नाम भी शामिल रहे। स्वगणना में शाहजहांपुर जिला सबसे आगे रहा, जबकि कौशांबी सबसे पीछे रहा। राजधानी लखनऊ में भी करीब 98 हजार से ज्यादा लोगों ने इस प्रक्रिया में भाग लिया। इससे साफ है कि डिजिटल जनगणना को लेकर लोगों में जागरूकता तेजी से बढ़ रही है।

 

हाउस सर्वे का यह पहला चरण 20 जून तक चलेगा। इस दौरान फील्ड कर्मचारी हर इलाके में जाकर मकानों की स्थिति, परिवार के सदस्यों और सुविधाओं से जुड़ी जानकारी एकत्र करेंगे। इसके बाद अगले साल फरवरी में जनसंख्या गणना का दूसरा चरण शुरू होगा। माना जा रहा है कि इस पूरी प्रक्रिया के बाद राज्य की विकास योजनाओं, सरकारी सुविधाओं और संसाधनों के सही वितरण में काफी मदद मिलेगी। क्योंकि किसी भी सरकार के लिए सही आंकड़े बेहद जरूरी होते हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और आवास जैसी योजनाएं इन्हीं आंकड़ों के आधार पर तय की जाती हैं।

 

जनगणना केवल आंकड़े जुटाने की प्रक्रिया नहीं होती, बल्कि यह किसी राज्य और देश की वास्तविक तस्वीर सामने लाने का सबसे बड़ा माध्यम होती है। उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य में यह काम आसान नहीं है, लेकिन डिजिटल तकनीक और बड़े प्रशासनिक अमले की मदद से सरकार इसे सफल बनाने की कोशिश कर रही है। आने वाले समय में यही आंकड़े प्रदेश की नीतियों और विकास की दिशा तय करेंगे। इसलिए लोगों का सहयोग और सही जानकारी देना बेहद जरूरी माना जा रहा है।

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