योगी सरकार का बड़ा एक्शन: कमीशनखोरी के आरोपित सहायक निदेशक और प्रधान सहायक सस्पेंड

योगी सरकार का बड़ा एक्शन: कमीशनखोरी के आरोपित सहायक निदेशक और प्रधान सहायक सस्पेंड

उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के खिलाफ योगी सरकार लगातार सख्त रुख अपनाती नजर आ रही है। इसी क्रम में राज्य सरकार ने प्रशिक्षण निदेशालय में तैनात दो अधिकारियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए उन्हें निलंबित कर दिया है। कमीशनखोरी, वित्तीय अनियमितताओं, कर्मचारियों के उत्पीड़न और पद के दुरुपयोग जैसे गंभीर आरोपों के चलते यह कार्रवाई की गई है। सरकार के इस कदम को प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

प्रदेश में लंबे समय से सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं। ऐसे में जब भी किसी अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ ठोस शिकायतें मिलती हैं, सरकार कार्रवाई करने से पीछे नहीं हट रही है। हालिया घटनाक्रम भी इसी नीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसने विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच एक स्पष्ट संदेश दिया है कि भ्रष्टाचार और अनुशासनहीनता किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

सहायक निदेशक पर 10 प्रतिशत कमीशन मांगने का आरोप

प्रमुख सचिव, व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता डॉ. हरिओम की ओर से जारी आदेश के अनुसार प्रशिक्षण निदेशालय में कार्यरत सहायक निदेशक धीरेन्द्र कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। उनके खिलाफ कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। आरोप है कि राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) में मशीनों, उपकरणों और साज-सज्जा के लिए उपलब्ध कराए गए बजट का समुचित उपयोग नहीं किया गया, जिसके कारण बड़ी धनराशि वापस करनी पड़ी।

इसके अलावा उन पर वित्तीय कार्यों में अनियमितता बरतने, सहकर्मियों को धमकाने और अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर बजट जारी करने के एवज में 10 प्रतिशत कमीशन मांगने जैसे आरोप भी लगाए गए हैं। विभागीय शिकायतों के अनुसार वर्ष 2024-25 के दौरान आहरण-वितरण अधिकारी रहते हुए कई प्रक्रियात्मक गड़बड़ियां सामने आई थीं।

मामले की गंभीरता को देखते हुए विभाग ने अनुशासनिक जांच शुरू कर दी है। संयुक्त निदेशक प्रशिक्षण मयंक गंगवार को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है। जांच पूरी होने तक धीरेन्द्र कुमार को देवीपाटन मंडल स्थित संयुक्त निदेशक कार्यालय से संबद्ध किया गया है।

प्रधान सहायक इमरान अहमद पर भी गिरी गाज

दूसरी ओर प्रशिक्षण निदेशालय में कार्यरत प्रधान सहायक इमरान अहमद के खिलाफ भी गंभीर शिकायतें सामने आई थीं। जानकारी के अनुसार विधान परिषद सदस्य डॉ. सुरेंद्र चौधरी ने उनके विरुद्ध कार्रवाई की मांग करते हुए पत्र लिखा था। शिकायतों में पद के दुरुपयोग, भ्रष्टाचार, कर्मचारियों के उत्पीड़न, धार्मिक भेदभाव और गिरोहबंद होकर कार्य करने जैसे आरोप शामिल थे।

इन आरोपों को गंभीरता से लेते हुए निदेशक प्रशिक्षण अभिषेक सिंह ने उनके निलंबन के आदेश जारी कर दिए हैं। विभागीय स्तर पर इस कार्रवाई को एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, क्योंकि इससे यह संकेत मिलता है कि शासन किसी भी स्तर पर अनुशासनहीनता और भ्रष्टाचार को लेकर समझौता करने के मूड में नहीं है।

प्रशासनिक व्यवस्था में जवाबदेही बढ़ाने की कोशिश

विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी संस्थानों में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए समय-समय पर ऐसी कार्रवाइयां आवश्यक होती हैं। जब अधिकारियों और कर्मचारियों को यह संदेश मिलता है कि उनके कार्यों की निगरानी की जा रही है और शिकायतों की निष्पक्ष जांच होगी, तब कार्य संस्कृति में सुधार की संभावना बढ़ जाती है।

योगी सरकार पिछले कुछ वर्षों से भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति पर जोर देती रही है। कई विभागों में जांच, निलंबन और अनुशासनात्मक कार्रवाइयों के माध्यम से प्रशासनिक जवाबदेही बढ़ाने का प्रयास किया गया है। हालिया कार्रवाई भी इसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।

13 जिलों के होमगार्ड कमांडेंट का तबादला

इसी बीच शासन स्तर पर एक और महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णय लिया गया है। उत्तर प्रदेश के 13 जिलों में तैनात जिला होमगार्ड कमांडेंट अधिकारियों के तबादले कर दिए गए हैं। पुलिस महानिदेशक होमगार्ड डीके ठाकुर ने सभी अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से अपने नए कार्यस्थल पर कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए हैं।

तबादला सूची के अनुसार ओम प्रकाश सिंह को जौनपुर से चित्रकूट, ज्ञान प्रकाश को संभल से मैनपुरी, विनोद कुमार झा को फिरोजाबाद से आजमगढ़, शैलेंद्र मिश्र को संत कबीरनगर से कुशीनगर तथा धीरेंद्र पांडेय को प्रतापगढ़ से अलीगढ़ भेजा गया है।

इसके अलावा नीता भारतीया को सुल्तानपुर से अमेठी, श्यामजीत शाही को अलीगढ़ से सीतापुर, नीरज कुमार शर्मा को कुशीनगर से फिरोजाबाद, विजय कुमार सिंह को सहारनपुर से जौनपुर तथा मनोज कुमार (प्रथम) को कन्नौज से सहारनपुर स्थानांतरित किया गया है। वहीं दिनेश ढींगरा को सीतापुर से प्रतापगढ़, मनोज सिंह बघेल को आजमगढ़ से जालौन और राजेश कुमार सिंह को जालौन से संभल जिले में नई जिम्मेदारी सौंपी गई है।

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