Primary ka master:- 120 सरकारी स्कूलों में नहीं मिला एक भी नया छात्र! BSA की सख्ती, वेतन रोकने तक की चेतावनी
उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले से बेसिक शिक्षा विभाग को लेकर एक चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। सरकार की ओर से बड़े स्तर पर चलाए गए ‘स्कूल चलो अभियान’ के बावजूद जिले के कई परिषदीय स्कूलों में नए छात्रों का नामांकन बेहद निराशाजनक रहा। हालत यह है कि 100 से ज्यादा सरकारी स्कूल ऐसे पाए गए हैं, जहां नए सत्र में एक भी बच्चे ने एडमिशन नहीं लिया। अब इस पूरे मामले को बेसिक शिक्षा अधिकारी ने गंभीरता से लिया है और जिम्मेदार शिक्षकों व प्रधानाध्यापकों पर कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
सरकारी स्कूलों में नामांकन बढ़ाने के लिए हर साल की तरह इस बार भी अभियान चलाया गया था। गांव-गांव रैलियां निकाली गईं। बच्चों और अभिभावकों को सरकारी स्कूलों की सुविधाओं के बारे में बताया गया। कई जगह अधिकारियों ने खुद पहुंचकर लोगों को जागरूक किया। इसके लिए शासन की तरफ से बजट भी जारी हुआ। लेकिन जमीन पर जो नतीजे सामने आए, उन्होंने विभाग की चिंता बढ़ा दी है।
गाजीपुर जिले में चल रहे 2266 परिषदीय विद्यालयों को इस अभियान के तहत प्रचार-प्रसार के लिए अलग से राशि दी गई थी। हर स्कूल को करीब 2500 रुपये उपलब्ध कराए गए ताकि शिक्षक बच्चों को स्कूल तक लाने के लिए बेहतर प्रयास कर सकें। शासन ने जिले को लगभग 63 हजार नए छात्रों के नामांकन का लक्ष्य दिया था, लेकिन अब तक करीब 27 हजार एडमिशन ही हो सके हैं। यानी लक्ष्य का आधा भी पूरा नहीं हो पाया।
सबसे ज्यादा चिंता की बात उन स्कूलों को लेकर है जहां एक भी नया नामांकन नहीं हुआ। आंकड़ों के अनुसार जिले के 112 विद्यालय ऐसे हैं, जहां कक्षा 1 और कक्षा 6 में एक भी नया छात्र नहीं जुड़ा। वहीं 530 से ज्यादा स्कूलों में पांच से कम बच्चों का एडमिशन हुआ है। यह स्थिति तब है जब शिक्षा विभाग लगातार सरकारी स्कूलों में बेहतर सुविधाओं और फ्री शिक्षा की बात कर रहा है।
ग्रामीण इलाकों में कई अभिभावक अब भी निजी स्कूलों की तरफ ज्यादा झुकाव दिखा रहे हैं। वजह सिर्फ पढ़ाई नहीं, बल्कि अंग्रेजी माध्यम, अनुशासन और बेहतर माहौल जैसी धारणाएं भी हैं। यही कारण है कि तमाम योजनाओं के बावजूद सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या उम्मीद के मुताबिक नहीं बढ़ पा रही। शिक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि केवल रैली निकालने से काम नहीं चलेगा, बल्कि स्कूलों में पढ़ाई की गुणवत्ता और अभिभावकों का भरोसा दोनों मजबूत करना होगा।
इस पूरे मामले पर बेसिक शिक्षा अधिकारी उपासना रानी वर्मा ने साफ कहा है कि जिन विद्यालयों में नामांकन शून्य है, वहां के प्रधानाध्यापकों और संबंधित शिक्षकों को दो दिन के भीतर स्थिति सुधारने के निर्देश दिए गए हैं। अगर इसके बाद भी नामांकन नहीं बढ़ता है तो वेतन रोकने जैसी कार्रवाई की जा सकती है। विभाग की इस सख्ती के बाद अब स्कूलों में हलचल तेज हो गई है।
सूत्रों की मानें तो पिछले साल भी नामांकन को लेकर सवाल उठे थे। उस दौरान कई बच्चों के नाम अलग-अलग स्कूलों में दर्ज पाए गए थे। बाद में यू-डायस पोर्टल पर डेटा अपडेट करते समय यह मामला सामने आया। इस बार ऑनलाइन प्रक्रिया के कारण फर्जी या डुप्लीकेट नामांकन पर रोक लगी है, लेकिन इसी वजह से एडमिशन की रफ्तार भी धीमी बताई जा रही है।
फिलहाल शिक्षा विभाग अब तेजी से स्कूलों में नामांकन बढ़ाने की कोशिश में जुट गया है। शिक्षकों को घर-घर संपर्क करने और अभिभावकों से बातचीत करने के निर्देश दिए गए हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकारी स्कूलों में छात्रों की संख्या बढ़ती है या फिर विभाग को और सख्त कदम उठाने पड़ेंगे।
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